गुरुकुल आश्रम शुक्रताल में विद्यार्थियों ने स्तूप बनाना, सरिया मोड़ना और मलखंब आदि क्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस दौरान स्वामी आनंद वेश महाराज ने कहा कि शारीरिक, सामाजिक और मानसिक विकास ही युवाओं के उज्जवल भविष्य का आधार है। देशसेवा ही सबसे बड़ी पूंजी है।
गुरुकुल आश्रम के प्रांगण में चल रहे चार दिवसीय वार्षिक उत्सव में ब्रह्मचारियों ने दूरदराज से आए श्रद्धालुओं को अपनी बेजोड़ योग क्रियाओं को दिखाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। जिसमें उन्होंने कमल स्तूप, मलखंब, रस्सा मोगरी, जंजीर को तोड़ना आदि की योग क्रिया द्वारा गले से सरिये को मोड़कर तालियां बटौरी। जिसमें गौरव पाल, सचिन, मोहित, शुभम, प्रशांत, मनीष, सिद्धार्थ, अभिषेक, विशाल, सुमित राठी, निशाल, तनिश, कुनाल, नितिन, चंकित, हरजीत, आशु तोमर आदि ने शानदार प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य प्रेमशंकर मिश्रा, आचार्य विकास, आचार्य राणा, आचार्य यज्ञबीर, आचार्य यशबीर आदि ने ब्रह्मचारियों की हौसलाअफजाई की। वहीं प्रधान सुशील शर्मा, चौधरी सुरेंद्र सिंह, नीरज बालियान, धर्मेंद्र शर्मा कृष्ण आर्य, बहन कांता आदि भी उपस्थित रहे।
यज्ञ की आत्मा होती है स्वाह : आर्यवेश
मोरना। शुक्रताल स्थित स्वामी भजनानंद तपोवन आश्रम में चल रहे कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे सार्वदेशिक सभा प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि यज्ञ की आत्मा होती है स्वाह। आहुति देते हुए स्वाह कहने का मतलब है कि अच्छा हुआ। मैं अच्छा होने का समर्थन करता हूं। यज्ञ का प्राण क्या है। पूरी दुनिया से यह तत्व गायब है। शांति गायब है। यज्ञ हमें सिखाता है कि मानव को यज्ञ के प्राण को समझना होगा। तभी शांति मिलेगी और स्थापित होगी। मौके पर विश्व में शांति स्थापना के लिए यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें स्वामी महानंद, स्वामी भजनानंद, स्वामी राजमुनि, नामदेव आचार्य, शिवपुजन, किरणपाल, राजबीर आर्य, नरेंद्र देव आर्य आदि ने भाग लिया। वहीं श्रीकृष्ण आर्य मुख्य यज्ञमान रहे।