‘भागवत से होती है अज्ञानता नष्ट’
मोरना। भागवत कथा में शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत अज्ञानता को नष्ट करती है। भागवत मन को पवित्र करने तथा प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति करने का साधन है। जो कण कण एवं अणु में समाया है। यह नश्वर शरीर कब पंचतत्व में विलीन होता है। उसका समय जानना कठिन है। परंतु जिस परमात्मा के अंश के रुप में मानव आया है। उस परमात्मा को जानना सरल एवं सुगम है। मनुष्य जीवन केवल धन प्राप्त करना ही नहीं है। बल्कि ज्ञान प्राप्त कर परमात्मा के स्वरूप को जानना है। श्रीराधा मोहन सत्संग मंडल द्वारा आयोजित भागवत कथा के कथावाचक राधावल्लभ नागार्च हितांशु और डोगरे कथा भवन में राठी परिवार द्वारा आयोजित कथावाचक चंदन कृष्ण शास्त्री को माला, पटका पहनाकर ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर जगदीश राठी, कुलदीप धारिया, बद्रीलाल पोरवाल, दाउदयाल आदि कथाओं में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, दूर दराज से आए कथा श्रद्धालुओं के लिए हर्षमणी, सुमन शास्त्री, राजू आदि व्यवस्था में रहे।