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श्रीकृष्ण के विवाह का सुंदर मंचन किया

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मुजफ्फरनगर। अबुपुरा स्थित अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पंडित सीताराम त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण के 16108 विवाह का सुंदर मंचन किया और भक्तों को भगवान के विवाह के बारे में संबोधन किया। बताया कि भगवान ने ये शादी क्यों की है? इसके पीछे क्या कारण है। उन्होंने बताया कि एक राक्षस ने इन कन्याओं को बंदी बना रखा था और कई वर्षों से वे कन्याएं बंदी थी, लेकिन वह राक्षस इतना अधिक बलशाली था कि कोई भी अगर उन्हें बचाने के लिए जाता तो वह राक्षस उसका वध कर देता। सभी बालिकाओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। तपस्या व पूजा करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी प्रार्थना को सुना और उन कन्याओं को वहां से मुक्त कराया। वे कन्याएं बोली कि भगवन आपने हमें मुक्त कराया है ये हमारा सौभाग्य है और हम यह ऋण आपका जीवन में भी नहीं उतार सकते, लेकिन हम अब जाये तो जाये कहां? ये दुनियादारी व समाज अब हमें जीने नहीं देगा। तो भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी व्यथा को समझा। जब वे भगवान श्रीकृष्ण के सामने प्रार्थना करने लगी कि हे भगवन हमें तो तुम अपने चरणों में स्थान दे दो, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन 16108 कन्याओं से एक ही पंडाल में विवाह किया था और उन्हें अपना नाम दिया था। इसके अलावा महाराज जी ने रूकमणि विवाह, कंस वध का भी वर्णन किया।
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