अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच और मॉनीटरिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग के डीएमसी नहीं है। जिला निरीक्षण मॉनीटरिंग कमेटी न होने से केंद्रों की मौज है। क्योंकि पीसीपीएनडीटी कमेटी को सीधे छापेमारी करने का अधिकार नहीं है। इसी का लाभ अल्ट्रासाउंड केंद्र उठा रहे हैं। वहीं, जिले में प्रतिबंधित पोर्टेबल मशीनें चलती है। जिनमें से जांच के बाद दो मशीनों को सील किया गया है। बाकी पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है।
जनपद में अल्ट्रासाउंड की करीब 80 से अधिक मशीनें संचालित है। जिन पर रेडियोलॉजिस्ट होना जरूरी है। इन अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रोजाना कितने मरीजों और किस स्तर की जांच हो रही है। इसकी जानकारी विभाग को प्रतिदिन रखनी होती है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के साथ सामान्य मरीजों की भी जांच होती है। खास यह है कि गर्भवती की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को उसकी आईडी, नाम-पता, चिकित्सकीय परीक्षण का रिकार्ड अलग से सुरक्षित करना होता है। जिसकी मॉनीटरिंग के लिए विशेष टीम बनी जरूरी है। जिसे जिला निरीक्षण एवं मॉनीटरिंग कमेटी (डीएमसी) कहते है।
विडंबना है कि जनपद में स्वास्थ्य विभाग ने पीसीपीएनडीटी की नई कमेटी तो गठित कर दी, मगर डीएमसी नहीं बनाई गई है। इससे अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों की मौज है। क्योंकि पीसीपीएनडीटी कमेटी छापेमारी नहीं कर सकती है। यह कमेटी डीएमसी द्वारा सौंपी जाने वाली अल्ट्रासाउंड केंद्र की रिपोर्ट का परीक्षण करने, सजा तय करने का कार्य करती है। उधर, जिले में प्रतिबंधित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन चल रही हैं। जिन पर कार्रवाई से विभाग बच रहा है। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि जिले में पीसीपीएनडीटी के साथ डीएमसी बनी हुई है, लेकिन कमेटी में किन-किन अधिकारियों, कर्मचारियों की नियुक्ति है। इसकी जानकारी नहीं है।
यह बनती है डीएमसी
जिला मॉनीटरिंग कमेटी के निर्माण के लिए सरकारी अफसर, एक एनजीओ, लेडी रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक के साथ नोडल अधिकारी, एक क्लर्क आदि चाहिए। जो जनपद में किसी भी अल्ट्रासाउंड पर कार्रवाई के लिए तैयार रहे। हालांकि कमेटी में सरकारी अफसर की नियुक्ति डीएम स्तर से की जाती है।
ऑफिस साथ लेकर चलती है कमेटी
डीएमसी का कार्य भी नेशनल मॉनीटरिंग कमेटी की तर्ज पर होता है। छापेमारी की गोपनीयता बनाए रखनेे लिए डीएमसी को पूरा ऑफिस साथ लेकर चलना होता है। इसमें विभाग में मौजूद अल्ट्रासाउंड केंद्रों की फाइल को एक अलग से कार में रखा जाता है। जिन फाइलों में डीएमसी रास्ते में छापेमारी के लिए एक फाइल का चुनाव करती है। ताकि छापेमारी की सूचना लीक न हो सके।