मंगल कलश यात्रा के साथ 37 वां नर नारायण सेवा यज्ञ समारोह शुरू
देवबंद। गीता जयंती के उपलक्ष्य में गीता भवन में 37वां नर नारायण सेवा यज्ञ समारोह मंगल कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ। जिसमें वृंदावन के संत प्रियदास महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन किया। कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
श्री गीता प्रचार समिति सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में 17 दिसंबर तक चलने वाले इस आयोजन के दूसरे दिन संत प्रियदास महाराज ने कहा कि कलयुग में ज्ञान एवं कर्म मार्ग की अपेक्षा भक्ति मार्ग सबसे सुगम व श्रेष्ठ है। भारत में जहां ज्ञानी व कर्मी ईश्वर प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, वहां दूसरी ओर भक्त का दर्शन करने करने भगवान स्वयं आते है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता है। जब दुर्वासा ऋषि ने अंबरीष को कष्ट देने के लिए कृत्या भेजी तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त अंबरीष की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र भेज दिया। सुदर्शन ने तीनों लोकों में दुर्वासा का पीछा किया। अंत मे दुर्वासा ऋषि को अंबरीष के चरणों में ही अभय दान मिला, क्योंकि भगवान भी भक्त के आधीन होते हैं। भगवान भक्तों कि रक्षा करने के लिए ही अवतरित होते हैं, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी गर्भ से अवतार लिया। इससे पूर्व पंडित विनय प्रकाश तिवारी ने विधि विधान के साथ पूजन संपन्न कराया। सोमवार को कथा के यजमान प्रीतम माहेश्वरी व प्रसाद वितरण मोहन माहेश्वरी द्वारा किया गया। इस मौके पर अतुल माहेश्वरी, छत्रपाल शर्मा, मंजू शर्मा, अजय बंसल, सुधीर गर्ग, रितेश बंसल, आर्यवर्त शर्मा, राजकुमार जाटव, सुनील बंसल, सोमनाथ गुप्ता, दुर्गेश शर्मा, ममता पाल, डॉ. कांता त्यागी, मीरा और अनीता आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
गीता भवन में श्रीमद् भागवत कथा का वर्णन करते संत प्रियदास महाराज- फोटो : DEVBAND