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सामूहिक नकल प्रकरण में शिक्षा सचिव से मांगी रिपोर्ट

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सामूहिक नकल प्रकरण में शिक्षा सचिव से मांगी रिपोर्ट
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मुजफ्फरनगर। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में सामूहिक नकल पकड़े जाने के बाद फिजिक्स विषय में समान अंक मिलने के मामले में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है। उपमुख्यमंत्री ने सचिव को शीघ्र ही पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में राजकीय हाईस्कूल रोनी हरजीपुर और जीआईसी मुथरा का बोर्ड सेंटर लगा था। इन दोनों विद्यालयों से गैर राज्य-गैर बोर्ड के इंटरमीडिएट के 623 छात्रों ने परीक्षा फार्म भरे थे। बाढ़ के कॉलेज में सामूहिक नकल की शिकायत डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को की गई थी। 22 फरवरी को फिजिक्स के पेपर में एसटीएफ गाजियाबाद ने छापा मारकर बाढ़ में सामूहिक नकल पकड़ी। नकल माफिया कमर इंतखाब, सॉल्वर सहित 17 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया। जिला प्रशासन की संस्तुति पर फिजिक्स की इस सेंटर की परीक्षा रद्द कर दी गई। दोबारा जीआईसी मुजफ्फरनगर में परीक्षा हुई। इंटरमीडिएट का रिजल्ट आया तो सब हैरान रह गए। 623 में से 578 छात्रों के समान अंक 52-52 आए। प्रैक्टिकल में पूरे 30 अंक मिले। इस तरह 100 में 82 अंक फिजिक्स में सभी ने पाए। गणित में 130 छात्रों के समान अंक 33-33 आए। हिंदी में 330 छात्रों के 75-75 अंक हैं। डीएम अजय शंकर पांडेय ने जांच कराई तो गड़बड़झाला पाया गया। मार्कशीट सहित पूरी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को भेजी गई। पूरे मामले में ढीली कार्रवाई होने पर शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह शनिवार को लखनऊ जाकर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से मिले। पूरे प्रकरण की विस्तार से जानकारी दी। रविंद्र सिंह ने बताया कि जो खेल हुआ है, वह ग्रामीण अंचल के जीआईसी को माध्यम बनाकर किया गया है। डिप्टी सीएम ने पूरी जानकारी लेने के बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव से पूरे मामले की तत्काल जांच कराकर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। डिप्टी सीएम ने रविंद्र सिंह को भरोसा दिलाया कि इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी।
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जांच को प्रभावित कराने का आरोप
मुजफ्फरनगर। शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह ने डिप्टी सीएम को बताया कि डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की नकल माफिया से संलिप्तता उजागर हो चुकी है। जिला प्रशासन अपनी रिपोर्ट भी दे चुका है। इसके बाद भी डीआईओएस अभी तक नहीं हटाए गए हैैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके नाम से कुछ फर्जी शिकायतें मामले को उलझाने के लिए कराई गई हैं। उसने संस्थागत छात्रों की कोई शिकायत नहीं की है।
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