धन के अभाव में गांवों में नहीं हो रहे विकास कार्य
मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा 14वें वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों में कार्य मनरेगा के तहत कराने पर प्रधानों में उबाल है। अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने मंडलीय सम्मेलन कर अपनी करीब दर्जनभर मांगों पर मंथन किया। प्रधानों ने कहा कि केंद्र सरकार की डप्टेल के माध्यम से गांवों में विकास कार्य कराए जाने संभव नहीं है। क्योंकि आम मजदूरी और मनरेगा की मजदूरी में जमीन-आसमान का फर्क है।
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने किया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान विकास की अहम कड़ी है। गांव सुंदर और विकसित होंगे तो समाज भी तरक्की करेगा। ग्राम प्रधानों की जो समस्या है, उसे शासन स्तर पर निपटाने का आश्वासन दिया। संगठन के मंडल अध्यक्ष सतेंद्र बरवाला ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण गांवों में विकास कार्य करने में बाधा आ रही है। कई-कई माह से गांवों में विकास कार्य रुके पड़े हैं। मनरेगा के तहत कार्य कराने में सबसे बड़ी बाधा मेहनताने की है। मनरेगा में मजदूरी 174 रुपये है, इसके मजदूर मिलना भी चुनौती है।
मंडल उपाध्यक्ष प्रधान विजय त्यागी आखलौर ने कहा कि 14वें वित्त आयोग के कारण कई कार्य रुक गए हैं। गांवों की जनता उन्हें परेशान कर रही है। डप्टेल के माध्यम से कार्य होने पर प्रधानों को दिक्कते होंगी। इसके बाद गांवों में बिगड़ रहे माहौल पर चिंता व्यक्त की गई। गांवों में आपसी भाईचारा और सौहार्द पैदा करने के लिए ग्राम प्रधान गांवों के जिम्मेदार लोगों का साथ लेकर कार्य करेंगे। इसके लिए गांवों में सभा होगी। सम्मेलन में प्रधान नवीन राठी भूराहेडी, भूपेंद्र राठी खानूपुर, अरविंद्र रोहाना कलां, देवेंद्र जागाहेड़ी, अजय मलीरा, दानिश पावटी, मोहम्मद दीदाहेड़ी, लाला, चंद्रवीर राठी, सुरेंद्र कुमार, अनुज पहलवान, जाकिर छपार, नाजिम, सुभाष, देवेंद्र बालियान किनोनी, जगपाल बरुकी, विदित मलिक कादीखेड़ा, मनीष चौधरी सिमर्थी, आशीष चौधरी, श्रीभगवान शर्मा, प्रदीप, अशोक, इनामुल, नरपत सिंह समेत दर्जनों गांवों के प्रधान मौजूद रहे।