बच्चों में कम अंक आने का बढ़ रहा तनाव
मुजफ्फरनगर।
विद्यार्थियों की जिंदगी परीक्षाफल के तनाव में छटपटा रही है। पहले एग्जाम की तैयारी का फोबिया और फिर रिजल्ट में उम्मीद से कम अंक आने से उपजे अवसाद में बच्चों की जीवन से निराशा चिंताजनक है। जिले में इंटरमीडिएट की दो छात्राओं नैना और अंजलि ने केवल इसलिए आत्महत्या कर ली कि उनकी द्वितीय श्रेणी आई है। एग्जाम से पहले तनाव मुक्त रहने की काउंसलिंग भी नंबर के फेर में उलझे छात्र-छात्राओं में सकारात्मक नजरिया कायम करने में सफल नहीं हो रही है।
यूपी बोर्ड का रिजल्ट घोषित होने के बाद जिले में 12 वीं की दो छात्राओं के जान देने से हर कोई चिंतित है। कम अंक आने के कारण यह छात्राएं डिप्रेशन में आ गई थीं। सीबीएसई ने एग्जाम से पहले कॉलेज में काउंसलिंग प्रोग्राम रखा था, जिसमें विद्यार्थियों को तनाव मुक्त होकर परीक्षा की तैयारी करने की टिप्स दी गई थी। साथ ही परीक्षा के दौरान आहार, निंद्रा, स्टडी टाइम की जानकारी विशेषज्ञों ने दी। खुद पीएम मोदी ने देशभर के बच्चों से एग्जाम के मुद्दे पर सीधा संवाद किया था। जागरूकता की पहल के बावजूद बच्चों में परीक्षा को लेकर लगातार तनाव बढ़ रहा है। रिजल्ट घोषित होने के बाद सबसे ज्यादा अवसाद की स्थिति आती है। यह 24 घंटे के भीतर दो छात्राओं के सुसाइड से साफ जाहिर हो रहा है। दोनों घटनाओं में छात्राओं ने परिजनों से मन की बात साझा नहीं की और जिंदगी को खत्म करने का फैसला कर लिया। नैना ने रेल से कट कर जान दी, जबकि अंजलि ने चुपचाप जहर खा लिया। इन छात्राओं को फर्स्ट डिजीवन आने की उम्मीदें थी, लेकिन उन्होंने कम अंक आने पर जान दे दी।
हर विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमता अलग
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रपति पदक से अलंकृत एवं डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवकुमार यादव का कहना है कि परिजन बच्चों से अधिक अंकों की अपेक्षा न रखें, क्योंकि हर विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमता, पढ़ाई का तरीका और परिवार का माहौल अलग होता है। मेहनत से पढ़ाई करें, नंबर भले ही अंक कम आए। द्वितीय श्रेणी के विद्यार्थी एमबीबीएस, आईआईटी, सिविल सर्विसेज में चुने गए हैं। वह खुद छात्र जीवन में द्वितीय श्रेणी के विद्यार्थी रहे।
बच्चों की क्षमता समझे अभिभावक
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेशचंद का कहना है कि अभिभावक बच्चों के मन और उनकी क्षमता के अनुरूप अपेक्षा रखे। पॉजिटिव तरीके से उत्साहवर्धन करें और शिक्षकों से मार्गदर्शन दिलाए। संवादहीनता की वजह से ही बच्चें अवसाद में घिर जाते है। शिक्षण संस्थाओं में परीक्षा को लेकर काउंसलिंग अवश्य होनी चाहिए। लगातार परिश्रम, लगन से कोई भी विद्यार्थी करियर में चमक जाता है।