छपार (मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज छपार के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ यज्ञ में जनकल्याण, राष्ट्रीय एकता और सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां अर्पित कर किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति सत्य और न्याय का मार्ग दिखाती है।
छपार में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव के उद्घाटन समारोह में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद ने भारत में वेदों की ज्ञान ज्योति जगाई थी। समाज सुधार को ऋषि के कार्य आज भी प्रासंगिक है। वेदानुकूल आचरण ही हमारी संस्कृति है। छल-कपट, अन्याय, अत्याचार, हिंसा, अंधविश्वास, पाखंड को त्यागकर मन और वचन से शुभ कर्म करना चाहिए। पुण्य कर्म से आत्मा और अंत:करण पवित्र होकर मनुष्य में देवत्व गुण आते है। दुख हो या सुख, सब कर्मों का फल होता है। आचार्य रणवीर आर्य ने कहा कि यज्ञ अग्निहोत्र संस्कृति का आधार है। यज्ञ से सेवा, दान, सत्कार, परोपकार आदि देवत्व गुण जाग्रत होते हैं। निस्वार्थ यज्ञ से जीवन में स्वर्ग की प्राप्ति होती है। युवा वैदिक साहित्य पढ़ें, यज्ञ और योग अपनाएं। डॉ. सुभाष चंद आर्य, सोनाथ आर्य, बाबूराम आर्य, रवेंद्र आर्य, आरपी शर्मा, आनंद पाल सिंह, योगेश्वर आर्य, मंगत राम आर्य, सोमपाल आर्य आदि ने विचार रखे। प्रात: यज्ञ में आचार्य सुरेंद्र कुमार ब्रह्मा और यज्ञमान अजय आर्य तथा राम कुमार गुप्ता सपत्निक रहे। भजनोपदेशक राजवीर आर्य ने महर्षि दयानंद की राष्ट्र सेवाओं की महिमा सुनाई। संचालन सुधारक ने किया।