चरथावल। चीनी मिलों द्वारा गन्ना इंडेंट जारी करने की गति बेहद धीमी होने से किसानों में गुस्सा है।
खेतों में अन्य खेती को छोड़कर सिर्फ गन्ने की तरफ मोह करना किसानों के लिए मुसीबत बनने लगा है। गन्ने की आपूर्ति सिर्फ चीनी मिलों पर टिकी है। जिससे मिलों के एकाधिकार के सामने किसान खेतों में किसान गन्ने छिलाई करते हैं। मगर पर्चियां नहीं मिलने से खेतों में गन्ना कई दिनों तक सूखता रहता है। जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने से नुकसान हो रहा है। मुथरा ग्राम प्रधान सुरेश पाल कहते हैं कि हर वर्ष 15 जनवरी तक खेतों में पेड़ी गन्ना खत्म हो जाता था। मगर अभी तक खेतों में पेड़ी भी खत्म नहीं हो पाई है। पर्चियां आने की सुस्ती का आलम इतना है कि पेराई सत्र के चार महीने बीत चुके हैं। अभी भी करीब 50 से 55 फीसदी गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है। महाबलीपुर के किसान टीटू, संजीव चौधरी, ओपिन चौधरी और चरथावल के असलम त्यागी बताते हैं कि गन्ना कलेंडर के 12 खानों में से मात्र अभी चार से पांच की पर्चियां आ पाई हैं। किसान दीपचंद सैनी, दिनेश त्यागी, रमेश चंद कहते हैं कि गन्ना आपूर्ति में विलंब के साथ भुगतान में देरी होने से शादी आदि कार्य करने के लिए साहूकारों पर निर्भर होना पड़ रहा है।