जिले में मूल्यांकन का कार्य निपटाना आफत बना हुआ है। जिले में हिंदी, इंग्लिश के साथ गृह विज्ञान की करीब दस हजार से अधिक कापियों बिना मूल्यांकन के पड़ी है। हिंदी में करीब 40 परीक्षक और गृह विज्ञान, इंग्लिश में करीब आधा दर्जन परीक्षक जरूरत है।
मूल्यांकन कार्य में इस साल पहले के मुकाबले अधिक शिक्षक लगाए गए, ताकि कार्य को समय पर निपटाया जा सके। ऐनवक्त पर वित्तविहीन शिक्षकों ने बहिष्कार का बिगुल फूंक दिया। माध्यमिक वित्तविहीन स्कूलों का एक भी शिक्षक मूल्यांकन में भाग लेने नहीं पहुंचा। इससे स्थिति अधिक बिगड़ गई। 31 मार्च को खत्म होने वाला मूल्यांकन अब तक बाकी है। किसी तरह विभागीय अफसरों हाईस्कूल के केंद्रों पर मूल्यांकन कार्य को पूर्ण कराया। जबकि इंटरमीडिएट के केंद्रों पर स्थिति जस की तस है। जीआईसी केंद्र परीक्षकों की कमी से जूझ रहा है। यहां 5000 कापियां हिंदी, 2000 कॉपियां गृह विज्ञान की पड़ी है। अब सवाल है कि एक परीक्षक को एक दिन में 45 से 50 कापियां जांचने को दी जा सकती है। इस केंद्र पर एक दिन में 50 परीक्षक भी तैनात किए जाएं तो 2500 कॉपियों का मूल्यांकन ही हो सकता है। स्थिति साफ की अभी केंद्र पर काम पूरा होने में दो दिन का वक्त लगेगा। इसी तरह डीएवी इंटर कालेज में इंग्लिश की कॉपियों की भरमार है। यहां पर इंग्लिश के परीक्षक नहीं है। केंद्र पर करीब 20 परीक्षक लगाने होंगे, तभी कार्य पूरा हो सकेगा। मूल्यांकन प्रभारी एवं प्राचार्य रमेशचंद शर्मा ने बताया कि मूल्यांकन अभी दो दिन और चलाना पड़ेगा। परीक्षक नहीं मिल सके हैं। जिसके चलते कॉपियों का मूल्यांकन बाकी है।