कुटेसरा गांव में आवारा कुत्तों के हमले से दो बच्चों की जान जा चुकी है। आवारा कुत्ते आए दिन जंगली जानवरों को निवाला बना रहे है। इसके बावजूद प्रशासन इन खूंखार कुत्तों से ग्रामीणों को निजात दिलाने में नाकाम है। ग्रामीण अंचलों में अकेले बच्चों केा माता-पिता स्कूल भेजने में कतराने लगे हे।
कुटेसरा-डहरा का जंगल दो जिलों की सीमा से सटा है। करीब एक साल से यहां कुत्तों के कई झुंड नजर आने लगे है। इसके पीछे एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पूर्व प्रधान तांजीम त्यागी ने बताया कि गांव से कुछ ही दूरी पर देवबंद नगरपालिका है। वहां से ठेकेदार 200 से 250 की दर से प्रति कुत्ता पकड़कर जंगलों में छोड़ रहा है। इससे यहां के जंगलों और आबादी में आवारा कुत्ते घूम रहे है। करीब 10 माह पूर्व उनकी धेवती को कुत्तों ने नोंचकर मार डाला था। किसान सेवा समिति के संचालक अब्दुल रऊफ का कहना है कि आवारा कुत्तों के हमले की घटना से ग्रामीण परेशान है। लेकिन प्रशासन इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा है। पूर्व प्रधान याकूब अली ने बताया कि गांव के पावटी रोड़, जखवाला रोड और डहरा के जंगल में कुत्तों के कई झुंड देखकर अकेला बच्चा क्या ग्रामीण भी घबरा जाता है। कामिल त्यागी ने बताया कि उनके परिवार के छह साल के बच्चे पर कुत्तों ने पहले गर्दन पर हमला किया था।
सीएचसी में 15 दिन से खत्म है इंजेक्शन
चरथावल। कुटेसरा, दधेडू के अलावा रसुलपुर समेत कई गांवों के जंगलों और आबादी में आवारा कुत्ते ग्रामीणों को निशाना बनाते है। सीएचसी में हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को कुत्ते काटने का निशुल्क इंजेक्शन लगाया जाता है। मगर, पिछले एक पखवाड़े से इंजेक्शन खत्म होने के कारण पीड़ितों को लौटना पड़ रहा है। प्रभारी डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि इंजेक्शन की डिमांड जिला मुख्यालय को भेज दी गई है।