बुढ़ाना। सड़क पर ही गर्भवती को बच्चा होने के मामले में डीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक और स्टाफ को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि के आदेश दिए हैं।
रतनपुरी क्षेत्र के गांव भनवाड़ा निवासी यूसुफ बृहस्पतिवार रात को प्रसव पीड़ा से परेशान पत्नि फरजाना को लेकर अपनी माता व गांव की सरकारी दाई के साथ 22 जून को देर रात के समय बुढ़ाना सीएचसी पर पहुंचा था। यूसुफ व गांव की सरकारी दाई शब्बीरी ने महिला चिकित्सक को स्थिति से अवगत कराते हुए फरजाना को भर्ती करने को कहा । आरोप है कि सीएचसी में मौजूद महिला व पुरूष चिकित्सक ने दुर्व्यवहार किया और उसको सीएचसी में भर्ती करने से मना कर दिया। महिला को निजी चिकित्सालय में ले जाते समय प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने सड़क पर ही नवजात बालिका को जन्म दे दिया था। जिला चिकित्सालय से छुट्टी मिलने के बाद दोनो पति पत्नि ने डीएम से मिलकर घटना से अवगत कराया था। डीएम ने मामले की जांच उपजिलाधिकारी कोे सौंपी थी। सीएमओ की जांच टीम ने गांव की सरकारी दाई को दोषी ठहराया था।
डीएम ने उपजिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बुढ़ाना के चिकित्सक व स्टाफ को दोषी करार दिया। जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने अपने आदेशों में कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुढ़ाना के चिकित्सक व स्टाफ द्वारा घोर लापरवाही की गई। डॉ. गरिमा, स्टाफ नर्स लता तथा बी0एच0 डब्लू शीलावती पूर्णतया दोषी है। जिनको प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदत्त की जाती है। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आदेश की कॉपी भेजते हुए अपने आदेश में कहा कि जिसका उल्लेख इनके सेवा अभिलेखो में करते हुए अवगत कराया जाए। अपने आदेश की प्रतिलिपि डीएम ने उपजिलाधिकारी कुमार भूपेन्द्र के पास भेजी है। उपजिलाधिकारी कुमार भूपेंद्र ने अमर उजाला के साथ वार्ता में जानकारी से अवगत कराया।