मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में ‘प्रॉब्लम ऑफ वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट: फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स ऑफ द ताईसेई सॉयल सिस्टम‘‘ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। जापान की कंपनी ने जल के दूषित होने के कारण एवं उसके पुन:उपयोग के संबंध में जानकारी दी।
मुख्य अतिथि हिरोयूकी मिहारा, केनीची तमुरा, स्टूअर्ट कोनरली, यमानोउची हिरोसी, समर्थ गुप्ता और हिमांशु मिश्रा ने संगोष्ठी को संबोधित किया। जापान की कंपनी का पहला प्लांट श्रीराम कालेज में लगाया जाएगा। सेमीनार में संस्था चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने वेस्ट वाटर प्यूरीफिकेशन प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य टॉयलेट सीवेज से निकलने वाले दूषित अपशिष्ट जल का शुुद्धिकरण करके खेती में सिंचाई करने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। स्टूअर्ट कोनरली ने टीएसएस तकनीकी के बारे में बताया कि इसमें तीन टैंक होंगे, जिनमें से एक फिल्ट्रेशन टैंक होगा। यह टैंक प्रदूषित जल से अवशिष्ट पृथक कर उनको अलग-अलग डाइजेशन चैंबर्स में भेज देता हैं। डाइजेशन चैंबर से फिर यह जल प्राइमरी फिलटरिंग चैंबर में जाता है, जहां पर उसमें प्रसुप्त कणों की जैविक झिल्ली को सोखकर साफ जल को ऊपरी सतह पर भेज देता है। इस दूषित जल को स्वच्छ करने के लिए मिट्टी अवशोषण प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से सेप्टिक टैंक से बहने वाले प्राथमिक उपचार वाले पानी को सिफॉन प्रवाह और कोशिका रूप में मिट्टी में टफगार्ड के माध्यम से फैलाया जाता है। यह प्रणाली मिट्टी की सतह से जल के वाष्पीकरण को बढ़ावा देता है, साथ ही पौधों की जड़ों से पानी को खींचकर उनकी पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन को बढ़ावा देता है। डॉ डीकेपी सिंह, डॉ सम्राट सिंह, आलोक जैन, डॉ आलोक गुप्ता, डॉ विकास अग्रवाल, डा अश्वनी, डॉ आकांक्षा चौहान, प्राची श्रीवास्तव, आदित्य सैनी,पारूल चौधरी आदि मौजूद रहे।संचालन रुचि श्रीवास्तव ने किया।