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वेदानुकूल आचरण से होगी संस्कृति की रक्षा: आर्य

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आर्य समाज को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का संकल्प
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मुजफ्फरनगर।
आर्य समाज दतियाना के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव में समाज को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर प्रख्यात भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क को वैदिक प्रचार सेवा के लिए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मानित किया।
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सदर ब्लाक के गांव दतियाना में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और रक्षा के लिए वैदिक संस्कृति के सिद्धांतों को धारण करना होगा। सत्य, सदाचार, चरित्र, देशभक्ति, सेवा, त्याग, पवित्र आचरण आदि सद्गुणों की शिक्षा वेदों से मिलती है। संस्कृति राष्ट्र की प्राण होती है। डॉ, धीरज कुमार शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने मानव जीवन उत्थान के लिए सोलह संस्कारों की व्याख्या की है। बच्चों में बचपन से संस्कार रोपित करें। वेद ईश्वरीय वाणी है। वेदों के ज्ञान, विज्ञान से ही सृष्टि का स्वरूप बना है। वेद प्रत्येक प्राणी को मनुष्य बनने की शिक्षा देते हैं। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में आर्य समाज की अहम भूमिका है। पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ चेतना जगाए। भजनोपदेशक बेधड़क ने भजन के माध्यम से युवाओं से शाकाहार, यज्ञ, योग अपनाने का आह्वान किया। ब्रह्मानंद आर्य बरला, ललिता आर्या, हरिशंकर आर्य सहारनपुर, रविंद्र आर्य ने भी भजनों से ऋषि दयानंद की महिमा बताई। संस्था प्रधान भोपाल सिंह, सत्यवीर सिंह आर्य, गंगाराम आर्य, डॉ मोहर सिंह, डॉ भंवर सिंह आर्य, ज्ञान सिंह आर्य ने भी विचार रखे। संचालन मास्टर राजकुमार आर्य ने किया। यज्ञ में आठ विद्यार्थियों ने जनेऊ धारण किया।
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