मुजफ्फरनगर। जिले में युवाओं का दिल भी कमजोर हो रहा है। सबसे नाजुक अंग हृदय की सेहत बिगड़ रही है। इससे पूरे शरीर के कार्य करने की गति पर भी प्रभाव पड़ रहा है। जिला चिकित्सालय की ओपीड़ी में आने वाले मरीजों के आंकड़े चौका रहे हैं। कुल मरीजों में 30 फीसदी युवा दिल की बीमारियों से पीड़ित है। इसके अलावा कई बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी मिली है।
खाने-पीने में नमक अधिक लेने का शौक रखते तो संभल जाएं। औसतन प्रतिदिन चार ग्राम तक नमक खाया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक प्रयोग करने पर यह सीधे दिल पर असर डालता है। शहर की आबोहवा में घुल रहे जहर के कारण फेफड़े और दिल की पंपिंग प्रभावित हो रही है। इससे हार्ट अटैक, दिल की नसों का सुकुडऩा आदि मुख्य बीमारियां सामने आई है। हालांकि सर्दी के मौसम में दिल की ध्वनियां अधिक सिकुडती है, जो हार्ट अटैक के साथ रक्त को पूर्ण रुप से प्रेशर नहीं करते है। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के हार्ट विभाग में रोजाना 150 तक मरीज देखे जा रहे हैं। इनमें चौंकाने वाली बात यह है कि 25, 28 और 30 वर्ष की आयु के मरीज अधिक हैं, जो दिल की बीमारी से घिरे हैं।
इनमें ब्लड प्रेशर, कोशिकाओं में सूजन, दिल की वॉल आदि खतरनाक लक्षण मिल रहे हैं। ऐसे में साफ है कि युवाओं का दिल कमजोर पड़ रहा है। इसके अलावा चूल्हा-चौका करने वाली महिलाओं में धुएं के कारण दिल की नसे प्रभावित मिली हैं। हार्ट विभाग के चिकित्सक डॉ बीके जैन ने बताया कि युवाओं और बच्चों में भी दिल की बीमारियां देखने को मिल रही है। ओपीडी में ब्लड प्रेशर, छाती में सूजन के साथ अनेक दिल की बीमारियों से ग्रस्त लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। रोजाना करीब 150 मरीज आते हैं।
आरबीएसके को मिले कई बच्चे बीमार
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन (आरबीएसके) को जनपद में सर्वे करने के बाद काफी संख्या में बच्चे बीमार मिले हैं। इनमें आंख, नाक-कान के साथ कई दिल की बीमारी से पीड़ित मिले हैं। दिल की बीमारी से ग्रस्त बच्चों में जन्मजात दिल में छेद मिला है। अब इन बच्चों का उपचार स्वास्थ्य विभाग कराएगा। जिन्हें दिल्ली या अन्य बड़े हार्ट अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा।
ऐसा होता है दिल
औसतन मनुष्य का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है। इसका भार औसतन महिलाओं में 250 से 300 ग्राम और पुरुषों में 300 से 350 ग्राम होता है।
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ऐसे रखे अपने दिल का स्वास्थ्य
-अधिक ठंड में ठहलने से दूरी बनाए।
-अधिक नमक और तला-भुना भोजन न करें।
-नॉन वेज खाने का कम से कम प्रयोग करें।
-भरपूर मात्रा में करीब 5 लीटर पानी रोजाना पिएं।
-स्मोकिंग और तंबाकू का प्रयोग करने से बचे।
-सुबह के समय नियमित व्यायाम जरूर करें।
-हरी पत्तेदार सब्जी और फलों का रस पिएं।