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व्यापारियों के माइग्रेशन में जुटा वाणिज्य कर

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व्यापारियों के माइग्रेशन में जुटा वाणिज्य कर
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मुजफ्फरनगर। एक देश-एक कर का नया कानून लागू हुए 22 दिन गुजर गए हैं, लेकिन वाणिज्य कर विभाग शत प्रतिशत व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेट नहीं कर सका है। सबसे अधिक चुनौती कपड़ा व्यापारी बने हैं। इन व्यापारियों ने विरोध के चलते माइग्रेशन से हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि वाणिज्य कर जीएसटी के लाभ बताकर व्यापारियों का माइग्रेशन करने में लगा है। अभी तक जिले में 90 फीसदी व्यापारी जीएसटी में शामिल हो सके हैं। जनपद में सराफा, लोहा, सीमेंट, कपड़ा समेत अन्य छोड़े-बड़े व्यापारियों की वाणिज्य कर विभाग की नजर में संख्या 14 हजार है। इनमें से पहले राउंड में 11609 व्यापारियों को माइग्रेट किया जा चुका था, जबकि एक जुलाई से लागू हुई जीएसटी के बाद जिले में माइग्रेशन का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हालांकि 15 जून के बाद माइग्रेशन का डाटा अपग्रेड नहीं हो सका है। बाकी बचे व्यापारियों को जीएसटी में जोड़ने के लिए विभागीय अधिकारियों ने एड़ी चोटी के जोर लगा रखे हैं। सबसे बड़ा सिरदर्द कपड़ा व्यापारी बने हैं। व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में हड़ताल रखी है। ऐसे में माइग्रेशन से कपड़ा व्यापारी छूटे हुए हैं। वहीं, 24 जुलाई को वाणिज्यकर विभाग के सचिव भुवनेश्वर कुमार मॉनिटरिंग के लिए आ रहे हैं। इसको लेकर अधिकारियों ने कार्रवाई को तेज कर दिया है। कपड़ा व्यापारियों को जीएसटी के लाभ बताकर माइग्रेशन कराया जा रहा है। जीएसटी के जिला नोडल अधिकारी डीएस गौतम ने बताया कि जनपद में लगभग 90 फीसदी से अधिक व्यापारियों का माइग्रेट किया जा चुका है। कुछ ही व्यापारी बाकी हैं, जिन्हें माइग्रेशन किया जा रहा है, जबकि कार्यशालाएं कराकर व्यापारियों को जीएसटी के लाभ बताए जा रहे हैं।
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