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शिवलिंग परमात्मा शिव की प्रतिमा है: संतोष

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मुजफ्फरनगर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केशवपुरी ने महाशिव रात्रि पर्व का आयोजन किया। जिसमें रशिया से आई राजयोगिनी संतोष दीदी ने कहा कि शिवलिंग परमात्मा शिव की प्रतिमा है। परमात्मा निराकार ज्योति स्वरुप है।
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महावीर चौक स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित कार्यक्रम में संतोष दीदी ने कहा कि शिव और शंकर में महान अंतर है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है चिन्ह। अर्थात कल्याणकारी परमात्मा को साकार में पूजने के लिए शिविलिंग का निर्माण किया गया। शिवलिंग को काला इसलिए दिखाया गया, क्योंकि अज्ञानता रूपी रात्रि में परमात्मा अवतरित होकर अज्ञान-अंधकार को मिटाते हैं। परमात्मा शिव देवताओं एवं समस्त मनुष्यात्माओं के पिता हैं। उनका दिव्य अवतरण होता है। वे अजन्मा, अभोक्ता, अकर्ता और ब्रहमलोक के निवासी हैं। शिव और शंकर में उतना ही अंतर है जितना पिता और पुत्र में। शंकर का आकारी शरीर है, शंकर परमात्मा शिव की रचना है। शिव ने शंकर की इस कलियुगी सृष्टि के विनाश के लिए रचना की है। यही वजह है कि शंकर हमेशा शिवलिंग के सामने तपस्या करते दिखाई देते हैं। वह हमेशा ध्यान की मुद्रा में रहते हैं। जब धर्म ग्लानि, पापाचार, अत्याचार की अति होती है, तब परमात्मा का अवतरण होता है। संचालन वेद प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में जयंती दीदी, बीके शशांक, डॉ पीसी अग्रवाल, विनोद, डॉ एमएल गर्ग, टीएस रावत, नरेश, अरविंद प्रताप, मुकेश, जगदीश बालियान, अनिल बत्रा, केतन कर्णवाल, तनु, तोषी, पूजा, मुनेश, उर्मिल, अंजू सिंघल, मानसी, प्रतिमा, अंजलि आदि रहे।
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