पीएम आवास योजना में 925 को मिलेंगे मकान
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली सूची में मुजफ्फरनगर शहर का एक भी नाम नहीं है। जिले भर से मात्र 925 लाभार्थियों की सूची ही सरकार को गई थी, जो स्वीकृत हो गई है। इनमें 743 आवास छह नगर पंचायतों और 182 जिले के आवास जिले के गांवों में बनेंगे। लाभार्थियों का पैसा स्वीकृत करते हुए सरकार ने दिसंबर 2018 तक आवास का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक प्रत्येक बेघर को आवास का वादा किया है। केंद्र सरकार ने जिला प्रशासन से तत्काल में उन लाभार्थियों की सूची मांगी है, जिनकी जांच पूरी हो चुकी है। आनन-फानन में जांच कर रहे एनजीओ से सूची मांगी गई। जांच कर रही नोएडा की एनजीओ छह नगर पंचायतों में सिर्फ 743 की ही सूची दे पाई। इसमें सिसौली में 98, भोकरहेडी में 112, मीरापुर में 117, पुरकाजी में 123, जानसठ में 94, शाहपुर में 199 आवास स्वीकृत हुए हैं। मुजफ्फरनगर शहर का सूची में एक भी आवास नहीं है, जबकि यहां सबसे ज्यादा लगभग 40 हजार लोगों ने आवेदन किए है। डूडा के परियोजना अधिकारी धनप्रकाश ने बताया कि सर्वे का काम चल रहा है। सर्वे पूरा हो जाएगा तो दूसरी सूची भी सरकार को भेज दी जाएगी। जिले के 498 गांवों में से केवल 182 परिवारों को ही पीएम आवास योजना में शामिल किया गया है। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में सर्वे चल रहा है। जिन 182 की सूची भेजी गई है, यह 2012 के सर्वे के अनुसार है।
शहरी क्षेत्र में आवास को मिलेंगे ढाई लाख
मुजफ्फरनगर। शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में एक आवास के लिए ढाई लाख रुपये दिए जाएंगे। इसमें डेढ़ लाख केंद्र और एक लाख राज्य सरकार देगी। ग्रामीण क्षेत्र में आवास के लिए एक लाख बीस हजार ही मिल पाएंगे। अविवाहित बच्चे को अलग से आवास नहीं मिलेगा।
सर्वे नहीं हुआ पूरा
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना का शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का सर्वे बड़ी ही धीमी गति से चल रहा है। केंद्र सरकार एक घर के सर्वे के लिए कंपनी को 3200 रुपए दे रही है। इसके बाद भी कंपनी अनुभवहीन लोगों से काम करा रही है। ऐसे लोगों को पांच से दस हजार रुपये महीना दिए जा रहे हैं। कंपनी करोड़ों कमाने के चक्कर में सरकार की योजना को पलीता लगाने में लगी है। लखनऊ में बैठे सूडा के अफसरों और कंपनी के बीच खेल चल रहा है, जो सूची केंद्र को भेजी गई उसकी जांच भी परिपूर्ण नहीं है।