मुजफ्फरनगर। डीएम द्वारा जनसंख्या के आधार पर घोषित ग्राम पंचायतों के आरक्षण में इस बार जिले में 169 ग्राम पंचायतें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। यानी महिलाएं इन गांवों की सत्ता संभालेंगी।
जिले में नौ विकास खंडों में कुल 498 ग्राम पंचायत हैं, जिनमें से 188 को सामान्य श्रेणी में रखा गया है, जबकि 310 ग्राम पंचायतों में विभिन्न श्रेणी में आरक्षण लागू किया गया है। इनमें से 169 ग्राम पंचायतों की बागडोर महिलाओं के हाथों में होगी।
इन ग्राम पंचायतों में 91 महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जिनमें किसी भी जाति की महिला चुनाव लड़ सकती है। ओबीसी महिलाएं 48 ग्रामों में प्रधान बनेंगी, जबकि एससी महिलाओं की सत्ता 30 ग्राम पंचायतों में रहेगी।
एक अक्तूबर तक आपत्तियां होंगी दर्ज
डीएम द्वारा घोषित ग्राम पंचायतों के आरक्षण के संबंध में ग्रामीण एक अक्तूबर तक आपत्ति दर्ज कराएंगे। तीन अक्तूबर को आपत्तियां डीपीआरओ कार्यालय में एकत्र होंगी। चार और पांच अक्तूबर को डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी आपत्तियां का निस्तारण करेगी और आठ अक्तूबर को अंतिम सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
आरक्षण सूची देखने के लिए उमड़ी भीड़
जानसठ। ब्लाक कार्यालय में चस्पा की गई ग्राम प्रधान आरक्षण सूची देखने के लिए दिनभर भीड़ उमड़ती रही। कुछ ने खुशी मनाई, तो कुछ को मायूसी हाथ लगी। शनिवार को ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य आरक्षण की घोषणा होते ही ब्लॉक कार्यालय पर 61 ग्रामों की आरक्षण सूची लगाई गई। अपने गांव के आरक्षण में सीट किस जाति के लिए सुरक्षित हुई है, यह देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीणों का तांता लगा रहा। कुछ ग्रामीण आरक्षण की व्यवस्था को देखकर खुश नजर आए, तो कुछ ग्रामीण अपने गांव की सीट एससी, ओबीसी में जाने पर मायूस दिखाई दिए।
शस्त्र जमा कराएं
पंचायत चुनाव के मद्देनजर शस्त्र जमा होने शुरू हो गए हैं। शनिवार को पुलिस ने 150 लाइसेंसी हथियार जमा किए। इंस्पेक्टर धनंजय मिश्र ने बताया कि चुनाव को शांतिपूर्ण कराने के लिए क्षेत्र के अपराधियों पर नजर रखी जा रही है। जानसठ थाने के 610 शस्त्र लाइसेंस धारकों मेें से 150 ने हथियार जमा कराएं।
कइयों के अरमानों पर आरक्षण ने पानी फेरा
मुजफ्फरनगर। ग्राम पंचायतों में आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही प्रधान पद को लेकर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधान पद के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, वहीं वोटों के अलंबरदारों की भी आवभगत होने लगी है।
ग्राम प्रधान पद के लिए वैसे तो काफी समय से भावी उम्मीदवार तैयारी में जुटे थे, बस उन्हें इंतजार था आरक्षण का। शनिवार को प्रस्तावित आरक्षण घोषित होते ही उन्होंने तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। आरक्षण ने
कई भावी दावेदारों के अरमानों पर पानी फेर दिया।
एससी के लिए प्रधान पद आरक्षित होने पर उन्हें निराशा हाथ लगी, जबकि महिला के लिए आरक्षित पद होने की दशा में भावी उम्मीदवारों ने अपने स्थान पर परिजनों को चुनाव मैदान में उतारने का मन बना लिया है। आरक्षण के बाद देहात में अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की ही चर्चा है।
चौपाल, घर-घेर में चुनाव का ही जिक्र हो रहा है। भावी उम्मीदवार जोड़तोड़ की रणनीति में जुट गए हैं। चुनाव आते ही वोटों के अलंबरदारों को भी काम मिल गया है, जो भावी उम्मीदवारों से अपनी नजदीकी बढ़ाकर उन्हें वोटों की गुणा-भाग सिखाने में लगे हैं।