तपस्या से सब कुछ पाया जा सकता है
जानसठ। गांव मेहलकी में श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथावाचक बाल साध्वी लक्ष्मी ज्योति ने भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि तपस्या से सब कुछ पाया जा सकता है। भगवान शिव पार्वती से विवाह करने के लिए राजी नहीं थे, लेकिन पार्वती ने कठोर तपस्या कर उन्हें शादी करने के लिए मना लिया। शिव ने भी माना कि पार्वती भी मेरी तरह हटी है, वह बिना शादी किए नहीं मानेगी। कथावाचक ने कहा कि तपस्या से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। यदि मनुष्य भगवान के दर्शन करने के लिए तपस्या करना ठान लें, तो उन्हें भगवान के स्वयं ही दर्शन हो जाते हैं। कथावाचक ने कहा कि जब भोले की अनोखी बरात पार्वती के द्वार पहुंची। सभी देवता हैरान रह गए, वहां खड़ी महिलाएं भी डरकर भाग गई। भगवान शिव को इस विचित्र रूप में पार्वती की मां स्वीकार नहीं कर पाई और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया। परिस्थितियां बिगड़ती देख पार्वती ने शिव से प्रार्थना की वे उनके रीति रिवाजों के मुताबिक तैयार होकर आएं। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह प्रारंभ हुआ। माता पार्वती और भोलेबाबा ने एक दूसरे को वर माला पहनाई और विवाह संपन्न हुआ।