मुजफ्फरनगर। पुरानी पेंशन बहाली सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ झंडा बुुलंद कर रहे कर्मचारी नोटा से दूर रहे। मतदान से पूर्व जोरशोर से नोटा के पक्ष में प्रचार किया गया था। जैसे चुनावी परिणाम आए तो स्थिति विपरीत निकली। पोस्टल बैलेट से पड़े कुल 5879 वोटों में से मात्र 49 ही नोटा को गए।
लोकसभा चुनाव से पूर्व कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली तथा अन्य समस्याओं को लेकर मुखर थे। कर्मचारियों ने नोटा को चुनने की मुहिम भी शुरू की थी। उन्होंने अपने घरों पर स्टीकर चिपकाकर प्रत्याशियों से जनसंपर्क नहीं करने का अनुरोध किया था। कर्मचारी पुरानी पेंशन के बिना किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करने की बात कह रहे थे। कर्मचारियों के इस कदम से भाजपा नेताओं में खलबली मची हुई थी। उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नोटा को चुुना होगा, लेकिन मतगणना के बाद दावे गलत निकले। नोटा को कुल 5110 वोट पड़े हैं, लेकिन कर्मचारियों के वोटों का आंकलन पोस्टल बैलेट से होता है। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर कुल 5879 पोस्टल बैलेट से पड़े वोट वैध पाए गए। इनमें से 4245 भाजपा प्रत्याशी डा. संजीव बालियान को मिले हैं, जबकि 1501 रालोद उम्मीदवार चौधरी अजित सिंह के पक्ष में गए। नोटा को केवल 49 कर्मचारियों ने ही चुना है। इससे साफ है कि चुनाव से पूर्व चल रही नोटा की मुहिम मतदान के दौरान हवा हो गई। बताया जाता है कि मतदान से पूर्व सांसद डा. संजीव बालियान ने कर्मचारियों से संपर्क किया था। उन्होंने नोटा का चुनाव नहीं करने को कहा था। समझाया था कि वे अपने वोट का प्रयोग प्रत्याशी के पक्ष में करें। कर्मचारियों की मांग को वह सरकार के समक्ष पुरजोर तरीके से रखेंगे। राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष राहुल चौधरी का कहना है कि सांसद ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग को सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया था। इसलिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने उन्हें वोट किया है। डा. संजीव बालियान फिर से सांसद बन गए हैं। उम्मीद है कि वे कर्मचारियों की मांगें मानने के लिए सरकार से बात करेंगे।