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पुलिस ने नर्दोषों पर बरपाया कहर

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मुजफ्फरनगर। शहर में बवाल को रोकने में नाकाम रही पुलिस ने निर्दोषों पर जमकर कहर बरपाया। अस्पताल के सामने और इमरजेंसी में लाठीचार्ज कर राहगीरों को भी नहीं बख्शा। पुलिस ने कई लोगों को सड़क पर तड़पता छोड़ दिया।
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आंदोलन को समझने और उसे शांतिपूर्ण निपटाने में विफल पुलिस ने शहर में आम जनता पर जमकर कहर बरपाया। जिला अस्पताल चौराहे और इमरजेंसी में तो पुलिस ने सारी हदें पार कर दी। बीमारों की देखरेख के लिए आए तिमारदारों को भी पुलिस ने नहीं छोड़ा। अपने बेटे के साथ जिला चिकित्सालय में आए एकता विहार के सतीश गोयल को पुलिस ने बेरहमी से पीटा। उसके हाथ-पैर तोड़ डाले। उसे पुलिस की गाड़ी में डालने ही वाले थे तो उससे नाम पूछ लिया। जब पता लगा कि यह तो वैश्य समाज से है, उसे सड़क पर ही छोड़ दिया। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। सिमरथी से अपने ताऊ के पास मिलने आए अमित कुमार के सिर में पुलिस ने इतनी तेज लाठी मारी की उसका सिर खून से सन गया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिसने भी देखा इसे क्रूरता बताया। एसपी सिटी और एडीएम वित्त के नेतृत्व में आई पुलिस टीम ने यहां इमरजेंसी में मौजूद लोगों पर भी लाठीचार्ज कर दिया, जो लोग बीमारों के साथ आये थे, उन्हें भी नहीं बख्शा। पुलिस की इस कार्रवाई से इमरजेंसी में भगदड़ मच गई। लोग अपने बीमारों को छोड़ भाग खडे हो गए। कुछ मीडियाकर्मियों के विरोध के चलते पुलिस को पीछे हटना पड़ा। इसी के साथ पुलिस ने भरतिया कालोनी में भी लोगों को घरों से निकालकर जमकर कहर बरपाया। यहीं नहीं रेलवे स्टेशन पर साईधाम के सामने से बाहर निकली भीड़ पर पुलिस ने डीएम और एसएसपी की मौजूदगी में लाठीचार्ज किया। यहां काफी संख्या में लोग घायल हुए।
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