वाणी संस्था की मासिक गोष्ठी
मुजफ्फरनगर। साहित्यिक संस्था वाणी की मासिक गोष्ठी में कवियों ने रचना पाठ किया। रामपुरम में सुशीला जोशी के आवास पर हुए काव्य पाठ में जहां श्रृंगार रस की कविता सुनाई गई, वहीं सामाजिक बुराइयों पर व्यंग हुआ। रामकुमार रागी ने अपने रचना पाठ में कहा-तुम ही मेरे गीत का आधार हो, प्यार हो बस प्यार हो। चांद हो तुम मेरे लिए ईद का, बस तेरा दीदार हो दीदार हो। हास्य कवि गोपाल सिंह ने पढ़ा- लड़ना-झगड़ना रूठना दांपत्य जीवन का एक पार्ट है। अपने रूठे हुए पार्टनर को मनाना भी एक आर्ट है। ब्रह्मप्रकाश त्यागी ने सुनाया- सुंदर रचना लगती हो परवरदीगार की, तारीफ तेरी ना करूं, ये तौहीन रचनाकार की। डॉ. बीके मिश्रा, अंकित दीप, अनुज शर्मा, समीर कुलश्रेष्ठ, संतोष शर्मा, कमला शर्मा, सुशीला शर्मा, अमित धर्म सिंह, ब्रजराज सिंह, डॉ. जेपी सविता, ब्रजेश्वर त्यागी, प्रकाश सूना, प्रतिभा त्रिपाठी, रियाज अहमद आदि ने रचना पाठ किया।