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सच्चा मुसलमान कभी दहशतगर्द नहीं हो सकता

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भोपा/तितावी/छपार/शाहपुर। मोहर्रम की दसवीं तारीख पर जनपद भर में शिया सोगवारों ने जुलूस निकालते हुए मातमपुर्सी की। मजलिसों में जुल्म और जालिमों का डटकर सामना करने की अपील की गई।
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भोपा में शुक्रवार को शिया सोगवारों ने जमकर मातम किया। गांव बेलड़ा में जुलूस और ताजिया बरामद किया गया। मजलिस में वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली ने कहा कि सच्चा मुसलमान कभी दहशतगर्द नहीं हो सकता। इमाम हुसैन की कुर्बानी समस्त समाज के लिए एक मिसाल है, जिससे सबक लेकर जुल्म व जालिमों का डटकर मुकाबला किया जाए। उधर, गांव जौली, रहकड़ा, युसूफपुर, गादला, बेहड़ा थ्रू व गादला में भी मोहर्रम पर तकरीर व मातम हुआ। सीलओ भोपा राम मोहन शर्मा, थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बीपी सिंह चौकी समेत तमाम फोर्स ऐहतियातन मौजूद रहे।
उधर, तितावी में कदीम इमामबाड़ा सैदपुरा खुर्द ,बघरा, लड़वा व ढिंढावली में जुलूस-ए-अलम बरामद किया गया। मातमी जुलूस कदीम इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा पहुंचा, जहां मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना अमीर हसन लखनवी व मौलाना असगर मेहंदी ने हजरत अली व इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डाला।मातमी जुलूस में शिया सोगवारों ने जंजीरों से खूनी मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। नोहाख्वानी सलामत अली, अहसान अली, इमाम अली, सद्दन, शीराज, इंतजार व मुमताज और मर्सियाख्वानी वसी हैदर, शीराज, शबाब, हैदर अब्बास, इरशाद व बाबर अली ने की। छपार में मोहल्ला काजियान से ताजिया के साथ अखाड़ा निकाला गया, जिसमें युवाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। इसके बाद मातमी जुलूस निकाला गया। शाहपुर में मोहर्रम परंपरागत रूप से मनाया गया। इमामबाड़े से जुलूस निकालकर ताजिये करबला में दफनाए गए।
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