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देश में बहुत पहले बन जाना चाहिए था फांसी का कानून

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महिलाओं ने केंद्र सरकार के फैसले को सराहा
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खतौली।
महिलाओं ने कहा कि बच्चियों से दुराचार के आरोपियों को फांसी की सजा का प्रावधान काफी पहले हो जाना चाहिए था। महिलाओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश की तहेदिल से सराहना की है। महिलाओं ने उम्मीद जताई है कि इससे अपराध में कमी आएगी।
1-डॉ. ज्योति जैन का कहना है कि इस कानून के लागू होने से बच्चियों के साथ होने वाली रेप की वारदातों पर अंकुश जरूर लगेगा। नारी जाति दुख सहतीं हैं, लेकिन फिर भी किसी से कुछ नहीं कहती। अपने दुखों को अपने सीने में ही दफन कर लेतीं है। इसके बावजूद दरिंदें उनको अपमानित करें, ऐसे दरिंदों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनको सिर्फ फांसी की ही सजा मिले। कैबिनेट ने मंजूरी देकर यह सराहनीय कदम उठाया है। इससे महिलाओं को सशक्तीकरण होने पर बल मिलेगा।
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2-अलका ने कहा कि रेप की घटनाओं को अंजाम देकर नारी जाति को अपमानित किया जा रहा है। 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से रेप के मामले में सिर्फ फांसी की ही सजा दी जानी चाहिए। दुष्कर्म पर फांसी की सजा का कानून बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट का अच्छा कदम है।
3-इंदु का कहना है कि कठुआ और सूरत में बच्चियों के साथ हुई वारदातों ने देश को झकझोर कर रख दिया है। इस अपराध से बढ़कर कोई अपराध नहीं है। दरिंदगी इतनी की बच्चियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। फांसी देने का कानून बनाकर कैबिनेट ने प्रशंसनीय काम किया है।
4-संध्या नागर ने कहा कि आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश में बहुत पहले बदलाव हो जाना चाहिए था। नारी जाति को अपमानित करने वालों को सिर्फ फांसी की ही सजा मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार का कदम काफी प्रशंसनीय है।
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5-पिंकी ने कहा कि रेप के मामलों में दरिंदों को फांसी देने का कानून बनाने के लिए देश के सर्वसमाज की महिलाओं में बेहद खुशी की लहर है। इस कानून से महिलाओं को सशक्तीकरण होने पर बल मिला है।
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