आर्य समाज नईमंडी के वार्षिक होलिकोत्सव में समाज के नवनिर्माण के लिए वैदिक संस्कृति के अनुरूप जीवन बनाने का आह्वान किया गया। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि महर्षि दयानंद के सिद्धांत पहले सत्य को जानो और फिर मानो के आधार पर जीवन में निर्णय करें।
नई मंडी के दयानंद मार्ग स्थित आर्य समाज नईमंडी के भवन में आयोजित तीन दिवसीय होलिकोत्सव के दूसरे दिन प्रवचन में स्वामी सत्यवेश ने भजन के माध्यम से वैदिक सिद्धांतों पर चलने की प्रेरणा दी। आचार्य संजीव आर्य ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग वैदिक संस्कृति है। आर्य समाज में जीवन के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य बताए जाते हैं। आचार्य परमवीर आर्य ने वेद मंत्रों की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा सबका पालक है, सबको ऐश्वर्य देता है और सबका रक्षक है। अध्यक्षता करते हुए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद ने जातिभेद मिटाकर सबको यज्ञ, वैदिक शिक्षा का अधिकार दिया। जातिवाद से नहीं, मानवता से समाज और राष्ट्र का भला होगा। कथनी और करनी के फर्क को मिटाएं। बच्चों को संस्कारित बनाने को परिवार में यज्ञ करें, वैदिक विद्वानों को बुलाए। आहार, व्यवहार, आचरण में पवित्रता लाए। भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क ने क्रांतिकारी भजन सुनाकर देशभक्ति, राष्ट्र सेवा को प्रेरित किया। बालिका खुशी ने वेद मंत्रों से धरती सजाने का गीत सुनाया। महात्मा प्रेम मुनि, भजनोपदेशक कुंवर सुखपाल आर्य, राजपाल सिंह चाहल, सहदेव सिंह आर्य, योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह, कस्तूर सिंह स्नेही, जगदीश आर्य, वीरेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन कृपाशंकर शर्मा ने किया। दुपहर बाद गांधी नगर में प्रवचन, भजनोपदेश का कार्यक्रम संम्पन्न हुआ।