मुजफ्फरनगर। गत शनिवार को खतौली में हुए कलिंग उत्कल हादसे में घायल हुए एक और यात्री की मौत हो गई। इस यात्री का मेरठ मेडिकल में इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। अब उत्कल हादसे में मृतकों की संख्या 24 हो गई है।
पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस शनिवार शाम को खतौली में पीडब्ल्यूआई कर्मचारियों की घोर लापरवाही से बेपटरी होकर पलट गई थी। हादसे में 22 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 150 से अधिक यात्री घायल हुए थे। जिनमें से 97 मुजफ्फरनगर में तथा बाकी मेरठ में भर्ती कराए गए थे। 20 यात्रियों के शवों का पोस्टमार्टम मुजफ्फरनगर में कराया गया, जिनमें से 19 की पहचान हुई। एक का बृहस्पतिवार को अज्ञात में अंतिम संस्कार किया गया। इसकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी। जीआरपी मुजफ्फरनगर के थानाध्यक्ष किशन अवतार ने बताया कि शुक्रवार सुबह मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक 50 वर्षीय यात्री की भी मौत हो गई। जिसकी पहचान नहीं हो सकी है। जीआरपी मेरठ ने शव का अज्ञात में पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इस यात्री की मौत के साथ उत्कल हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है।
खतौली जीआरपी चौकी में अभी रखे हैं 20 बैग
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे में काफी यात्रियों का सामान गायब हुआ है, जिनकी तहरीर अभी भी जीआरपी को दी जा रही है। उधर, खतौली जीआरपी चौकी में 20 बैग रखे हैं, जिन्हें लेने कोई नहीं आया है।
उत्कल हादसे के बाद नागरिकों ने बचाव कार्य किया। ऐसे में अनेक यात्रियों का सामान भी गायब कर दिया गया। कुछ यात्रियों का सामान मौके पर पड़ा मिलका था। जिसे नागरिकों और आसपास के लोगों ने उठा कर जीआरपी को सौंपा था। हादसे के बाद काफी संख्या में यात्रियों के सामान के बैग जीआरपी के पास थे, जो बाद में घायलों और मृतकों के परिजन ले गए। मगर 20 बैग अभी ऐसे हैं, जिन्हे लेने कोई नहीं आया है, वो अभी भी खतौली जीआरपी चौकी में रखे हुए हैं। उधर, गायब हुए सामान की तहरीर लगातार जीआरपी को मिल रही है, जिन्हें जीआरपी दर्ज कर रही है। अधिकांश तहरीर मोबाइल फोन गुम होने और सामान न मिलने की आ रही है।
अस्पताल का पर्चा देख दिए जाएंगे बैग
जीआरपी थानाध्यक्ष किशन अवतार ने बताया कि करीब 20 बैग को अभी तक कोई लेने नहीं आया है। जो बैग लेने आएगा उसे अपने मरीज की अस्पताल के उपचार का पर्चा साथ लाना होगा, साथ ही बैग में मौजूद कुछ सामान के बारे में जानकारी देगी, तभी उन्हें बैग दिए जाएंगे।
आरपीएफ ने ट्रैक की सुरक्षा बढ़ाई
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे के बाद जहां पीडब्लूआई ने रेलवे ट्रैक पर कर्मचारी बढ़ाए हैं, वहीं आरपीएफ ने भी रात में रेलवे ट्रैक की सुरक्षा बढ़ा दी है। पांच किलोमीटर में आरपीएफ के दो जवान सशस्त्र ट्रैक की गश्त करेंगे।
मुजफ्फरनगर आरपीएफ थाना का दायरा सकौती नेशनल हाईवे ओवरब्रिज से लेकर टपरी पुल तक है। उत्कल हादसे के बाद आरपीएफ ने रात में ट्रैक की सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रत्येक पांच किलोमीटर में सशस्त्र दो सिपाही ट्रैक की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं, जो पैदल अपने क्षेत्र में ट्रैक पर गश्त करेंगे। उनकी यह ड्यूटी शाम छह बजे से सुबह पांच बजे तक है।
बोगियों की सुरक्षा का जिम्मा आरपीएसएफ को
मुजफ्फरनगर। उत्कल हादसे में क्षतिग्रस्त हुई 11 बोगियों की सुरक्षा का जिम्मा आरपीएसएफ (रेलवे सुरक्षा विशेष बल) को सौंपा गया है। यहां आरपीएफ थाने पर जवानों की कमी के कारण ऐसा किया गया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर सोनी शर्मा ने बताया कि आरपीएसएफ के 10 जवानों को यहां भेजा गया है, जिनमें से पांच दिन में और पांच रात में क्षतिग्रस्त बोगियों की सुरक्षा में तैनात रहेंगे। क्षतिग्रस्त बोगियों की कीमत करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये आंकी गई। हादसे में क्षतिग्रस्त हुई 11 बोगियों घटनास्थल पर ही पड़ी हुई हैं।