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दोबारा जांच से होगा पर्दाफाश

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मुजफ्फरनगर। उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के साथ ही नकल माफिया के रैकेट का पर्दाफाश हो जाएगा। डीएम की संस्तुति पर जांच का निर्णय अब शासन को लेना है।
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जनता इंटर कॉलेज बाढ़ में परीक्षा दे रहे गैर राज्य, गैर बोर्ड के विद्यार्थियों की सामूहिक नकल पकड़े जाने के बाद भी जिला प्रशासन नकल माफिया पर कठोर कार्रवाई नहीं कर पाया है। शिक्षा विभाग के अफसरों की जिले से लेकर लखनऊ तक इन माफियाओं के साथ संलिप्तता के चलते प्रशासन के सारे दांव फेल हो रहे हैं। डीएम अजय शंकर पांडेय ने नकल माफिया पर गैंगस्टर लगाने की संस्तुति की थी, लेकिन पुलिस की लचर कार्य प्रणाली के कारण आरोपियों को न्यायालय से स्टे मिल गया। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस पेपर में सामूहिक नकल पकड़ी गई, फिजिक्स में सभी छात्रों के 100 में 82 अंक हैं। इसमें जहां थ्योरी में सभी को समान 52-52 अंक मिले हैं, वहीं प्रेक्टिकल में भी सबके समान 30-30 अंक हैं।
गणित के पेपर में भी बड़ी संख्या में छात्रों को समान अंक 33 हैं। यह सब खेल प्रशासन की जागरूकता के बीच हो गया। पूरे तंत्र पर शिक्षा माफिया हावी दिखाई देते हैं। समान अंक आने का मामला लखनऊ तक गूंज गया है और सरकार की व्यवस्था पर भी एक प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन के लिए भी नकल माफिया पर कार्रवाई न होना चुनौती बन गया है। डीएम अजय शंकर पांडेय ने जिस तरह रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए शासन को जांच की संस्तुति की है, इससे शिक्षा विभाग में चल रहे खेल पर अंकुश लग सकता है। शासन उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराता है और नंबर कैसे आए इस पर गहराई तक पहुंचता है तो नकल माफिया के साथ विभाग के विभीषण भी सामने आ जाएंगे। डीएम की संस्तुति के बाद सभी की निगाहें शासन की ओर टिकी है।
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