मुजफ्फरनगर। एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी को लेकर ट्रांसपोर्ट कारोबारी भी परेशान हैं। जीएसटी में माइग्रेशन की सिरदर्दी पाले बैठे ट्रांसपोर्टरों को विभाग ने छूट दी है। ट्रांसपोर्टरों को जीएसटी से बाहर रखा गया है। कारोबारी को केवल वाणिज्य कर विभाग से एनरोलमेंट नंबर लेना पड़ेगा। वहीं, मॉल भेजने या मंगाने पर ट्रांसपोर्टरों पर कोई टैक्स लागू नहीं होगा। मॉल पर टैक्स व्यापारियों को अदा करना पड़ेगा।
कलक्ट्रेट सभागार में डीएम जीएस प्रियदर्शी और वाणिज्य कर विभाग ने जीएसटी पर ट्रांसपोर्टर और वाहन विक्रेता एजेंसियों के प्रतिनिधियों की मीटिंग लेने के बाद कार्यशाला की। वाणिज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर एमएम गोयल ने कहा कि गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। उन पर जीएसटी लागू नहीं होगा। ट्रांसपोर्टर जिसका माल ढो रहे हैं, उस व्यापारी को ही पांच फीसदी की दर से जीएसटी चुकाना पड़ेगा। वहीं, ट्रांसपोर्टरों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना भी कोई अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसमें एनरोलमेंट कराना जरूरी है। साथ ही वाणिज्यकर विभाग ने साफ किया है कि ट्रांसपोर्टर अपंजीकृत व्यापारी का माल ढोता है तो टैक्स देने की पूरी जिम्मेदारी ट्रांसपोर्ट की होगी। अधिकारियों ने कहा कि पहले जीएसटी में ई वे-बिल की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया दो माह बाद लागू होगी। ट्रांसपोर्टरों ने ओवरलोडिंग की समस्या उठाई। डीएम ने भी ट्रांसपोर्टरों को सही कारोबार करने की हिदायत दी।
जीएसटी के नोडल अधिकारी डीएस गौतम ने कहा कि वाणिज्य कर विभाग कभी ट्रांसपोर्टरों के पास छापेमारी कर व्यवस्था की जानकारी ले सकता है। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने ट्रांसपोर्टरों को बिना परमिट और पंजीकरण के वाहन नहीं चलाने पर जोर दिया।