सिखेड़ा (मुजफ्फरनगर)।
इंडिस्ट्रयों के दूषित पानी ने ग्रामीणों की हंसती-खेलती जिंदगी में जहर घोल दिया है। केमिकल युुक्त पानी के प्रयोग से ग्रामीण बेहाल हो गए हैं। बीमारियों के आगे बेबस ग्रामीणों की आधी तनख्वाह इलाज पर खर्च हो रही है। इससे परिवार को बजट बिगड़ गया है। कई महिलाएं मजदूरी कर अपना इलाज करा रही है। सिस्टम की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों ने सीएम को शिकायत भेजी है।
निराना, बहादरपुर, खेड़ीग्राम, धंधेड़ा, सिखरेड़ा आदि गांवों में इंडस्ट्रियों का गंदा पानी ग्रामीणों को बीमार कर रहा है। इन गांवों में अनेक बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। जिसकी चपेट में आधे से अधिक गांव है। हालात ऐसे हैं कि कई ग्रामीणों ने आधी तनख्वाह बीमारी के उपचार पर खर्च हो रही है। जबकि परिवार का गुजारा आर्थिक स्थिति के आगे घुटने टेक चुका है। गांव निराना निवासी लक्ष्मी पत्नी राकेश को कुछ समय पहले कैंसर हुआ था, तब उसकी जान बचाने के लिए उसका एक पैर काट दिया। हालांकि पांच पहले कैंसर उसके पति को निगल चुका है। अब वह अपनी दो बेटियों के साथ मजदूरी कर गुजारा कर रही है। वह आधी तनख्वाह बीमारी पर खर्च हो रही है। इसके अलावा तारावती की आंख खराब हो गई, मगर उपचार के लिए उसके पास पैसा नहीं है।
बेटी के हाथ पीले कर दिए, मगर खुद बीमारी से जूझकर मेहनत कर दो वक्त की रोटी जुटा रही है। चंद्रवती के पति वीरपाल की दो साल पहले मौत हो गई, लेकिन बेटा दिव्यांग है, जो बीमार रहता है। उसके इलाज के लिए चंद्रवती फैक्ट्री में मजदूरी करती है। हालांकि चंद्रवती को वीरपाल की मौत के बाद पेंशन मिल रही है। पेंशन भी बेटे अशोक दिव्यांग पर खर्च हो रही है। इसके अलावा भी गांव में कई परिवार ऐसे हैं। जिनकी आधा वेतन इलाज पर खर्च हो रहा है। बीते कई वर्ष से नारकीय जीवन जी रहे ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण और जल निगम जांच के नाम पर गुमराह कर रहा है। अधिकारियों ने आज तक गांव में आकर नहीं झांक सका है। ग्राम प्रधान इश्तकार ने बताया कि कई बार जांच और मेडिकल कैंप के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अब मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के साथ केंद्र सरकार को शिकायत भेजी है।