शहर में आवास स्वीकृत न होने का मामला गरमाया
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली सूची में मुजफ्फरनगर शहर का एक भी नाम नहीं होने का मामला गरमा गया है। नगर विधायक कपिलदेव अग्रवाल से जनता सवाल कर रही है। विधायक ने ईओ नगर पालिका और डूडा के पीओ से जवाब तलब किया। उधर, विपक्षी इसे बीजेपी के जनप्रतिनिधियों की गरीब जनता के प्रति उदासीनता बता रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले की दस निकायों में आवासहीन लोगों को आवास देने का अभियान चलाया जा रहा है। सभी निकायों से जिले में 50 हजार लोगों ने अपने को बेघर बताते हुए आवास के लिए आवेदन किया है। इसमें 40 हजार आवेदन अकेले मुजफ्फरनगर शहर के हैं। शासन ने आवास के लिए जो पहली सूची जारी की है, उसमें मुजफ्फरनगर शहर का एक भी पात्र शामिल नहीं है। जिला नगरीय विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी धनप्रकाश का कहना है कि आवेदन की जांच कर रही एनजीओ से कोई रिपोर्ट नहीं आने के कारण शहर के आवासहीन लोगों का नाम सूची में नहीं आ पाया। पहली सूची में जिले की छह निकायों में केवल 925 लोगों को ही आवास मिल पाएंगे। शहर के लोगों ने नगर विधायक के सामने मामला रखा। विधायक कपिलदेव अग्रवाल ने इस मामले को लेकर गंभीरता दिखाते हुए डूडा के परियोजना अधिकारी धनप्रकाश और ईओ नगर पालिका को अपने आवास पर तलब किया। दोनों अधिकारियों से शहर के लोगों का नाम सूची में नहीं आने का कारण पूछा। अफसरों ने जांच कर रही एनजीओ की गलती बताई। विधायक ने जल्द ही शहर के लोगों की सूची भिजवाने के लिए कहा। वहीं, विपक्षी इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की लापरवाही बता रहे हैं। पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि यदि मामले को गंभीरता से लिया जाता तो शहर के लोगों को लाभ जरूर मिलता। सपा नेता गौरव स्वरूप ने कहा कि सपा सरकार में प्रदेश की जितनी भी योजनाएं थी, उनके पिता चितरंजन स्वरूप ने शहर की जनता को उन योजनाओं का लाभ सबसे पहले दिलाया था।