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मेडिकल कालेज ने मांगे डिलीवरी के लिए मरीज

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मेडिकल कॉलेज ने मांगे डिलीवरी के लिए मरीज
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मुजफ्फरनगर। बेगराजपुर के मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज ने स्वास्थ्य विभाग से डिलीवरी के लिए मरीज देने की डिमांड रखी है। बाकायदा इसके लिए लिखित में कॉलेज की ओर से पत्र दिया गया है, जिसमें जननी सुरक्षा योजना के तहत डिलीवरी और उपचार किए जाने का पक्ष रखा है। कॉलेज की डिमांड पर फिलहाल विभाग चुप है।
मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज प्राइवेट स्तर की चिकित्सकीय संस्था है, जो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से संबद्ध है। मेडिकल कॉलेज चिकित्सा क्षेत्र का बड़ा हब है। इसको लेकर कॉलेज प्रबंधतंत्र की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र दिया गया है, जिसमें मेडिकल कॉलेज में प्रसव पीड़िताओं की डिलीवरी के लिए मरीज दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही कॉलेज प्रशासन ने कहा कि मेडिकल स्तर पर डिलीवरी वाली महिला को जननी सुरक्षा योजना का लाभ विभाग के स्तर से मुहैया कराया जाए। जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण स्तर पर गर्भवती महिला को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये दिए जाते हैं। यह धनराशि स्वास्थ्य विभाग जिला चिकित्सालय, सीएचसी आदि पर डिलीवरी होने पर ही देता है। प्राइवेट स्तर पर कोई लाभ नहीं दिया जाता है। मेडिकल कालेज के पत्र को लेकर विभाग जांच में लगा है। कॉलेज ने आशाओं के जरिये मरीज लाने की मांग रखी है। फिलहाल विभाग ऐसा नियम है या नहीं, इसकी जांच-पड़ताल में लगा है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार का कोई शासनादेश नहीं है। यदि प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया जाता है, उसे सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है। कॉलेज के पत्र पर जांच कराई जा रही है, फिलहाल मेडिकल कॉलेज को इंकार किया गया है।
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विभाग के रिकार्ड में तीन प्रकार से प्रसव
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग तीन प्रकार से प्रसव मानता है, जिनमें केवल अस्पताल पर प्रसव होने पर जेएसवाई का लाभ मिलता है। पहली सरकारी स्तर पर डिलीवरी, दूसरी प्राइवेट अस्पताल और तीसरा प्रसव घर पर माना गया है। प्राइवेट और होम डिलीवरी पर जेएसवाई का कोई लाभ नहीं है।
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महिला अस्पताल
मुजफ्फरनगर। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि स्वामी कल्याण देव जिला महिला चिकित्सालय मरीजों से ओवरलोड है। यहां औसतन एक माह में 1000 से अधिक महिलाओं का प्रसव होतप्ता है, जबकि सालाना 11 हजार से अधिक है। बेड की संख्या 100 है, लेकिन अस्पताल में 120 से 140 मरीज भर्ती रहते हैं। यदि प्राइवेट स्तर पर टाइअप करने के बाद महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है तो इससे मरीजों को राहत मिल सकती है।
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