प्लांट की करीब 84 बीघा जमीन में खड़े हैं कूड़े के पहाड़
मुजफ्फरनगर। नगरपालिका और एटूजेड के बीच भुगतान को लेकर छिड़ी जंग में कूड़े से शहर के हालात तो बदतर हो ही गए साथ ही रिसाइक्लिंग प्लांट में भी स्थिति विस्फोटक हो गई है। प्लांट की करीब 84 बीघा जमीन में कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े हो गए हैं। प्लांट का संचालन नहीं होने से कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा। प्लांट में कूड़ा डालने के लिए जगह नहीं बची है। इसलिए रास्ते तक ढेर लगने लगे हैं। पूरा किदवई नगर कूड़े के इन पहाड़ों से सड़ने लगा है।
शहर की सफाई व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। गली-मोहल्लों से सफाई कर डलावघरों से कूड़ा जमा किया जाता है। यहां से एटूजेड कंपनी के कर्मचारी वाहनों से कूड़ा उठाते थे और किदवई नगर स्थित रिसाइक्लिंग प्लांट में ले जाकर उसका निस्तारण करते थे। यहां कूड़े से खाद बनाई जाती थी। नगरपालिका पर लाखों का भुगतान बकाया होने के चलते करीब छह माह से रिसाइक्लिंग प्लांट बंद है। दस दिन से भी ज्यादा समय से एटूजेड ने नगर के डलावघरों से कूड़ा उठाना बंद कर दिया है। इसके बाद नगर पालिका अपने संसाधनों से कूड़ा उठाकर रिसाइक्लिंग प्लांट में डाल रही है, लेकिन रिसाइक्लिंग प्लांट बंद हैं। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। शहर से प्रतिदिन 150 टन कूड़ा निकलता है। रिसाइक्लिंग नहीं होने से हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि कूड़ा डालने के लिए जगह नहीं बची। किदवई नगर निवासी अब्दुल मजीद, खालिद, फरमान और शफीकन ने बताया कि कूड़े से भरे वाहनों को जब आगे ले जाने के लिए जगह नहीं मिलती तो नगर पालिका के कर्मचारी रास्ते में ही पलट रहे हैं। पूरा किदवई नगर कूड़े से बजबजा रहा है। बदबू के कारण आसपास खड़ा हो पाना भी मुश्किल हो गया है।
नगर पालिका के पास नहीं कोई योजना
कूड़े का निस्तारण करने के लिए नगर पालिका के पास कोई योजना नहीं है। एटूजेड कंपनी का लाखों रुपये बकाया है। पालिका के पास कर्मचारी भी इतने नहीं है कि प्लांट का संचालन कर सके। फिलहाल विस्फोटक होती जा रही इस स्थिति के शीघ्र सुलझने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
पॉकलेन मशीन लगाकर कूड़ा डालने के लिए जगह कराई जा रही है। इससे कूड़ा डालने के लिए जगह हो जाएगी। जल्द ही रिसाइक्लिंग प्लांट शुरू करने की योजना है। प्लांट के शुरू होते ही हालात सुधर जाएंगे।
- डा. आरएस राठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर पालिका।