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अब सहकारिता के लिए बीजेपी का चक्रव्यूह

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बीजेपी का अब सहकारिता के लिए चक्रव्यूह
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश की राजनीति में एकतरफा वर्चस्व कायम करने के बाद बीजेपी सहकारिता की राजनीति में भी परचम लहराने की तैयारी में जुटी है। पार्टी ने सहकारी संस्थाओं पर कब्जा करने के लिए समितियों में सदस्यता अभियान चलाया है। प्रत्येक साधन सहकारी समिति में 100 सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को सहकारिता में समायोजन करने की तैयारी है।
सहकारी संघों के चुनाव सितंबर में होने हैं। सहकारिता के क्षेत्र में बीजेपी हमेशा कमजोर पड़ती आई है। प्रदेश में सत्तासीन होने के बाद पार्टी ने सहकारिता में भी वर्चस्व कायम करने की कार्ययोजना तैयार की है। प्रदेश स्तर पर लिए गए फैसले के बाद पार्टी प्रत्येक सहकारी समिति में एक सौ सदस्य बना रही है। पार्टी जिलाध्यक्ष को इसकी जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपनी देखरेख में अभियान चलाएं। जिले में 68 सहकारी समितियां और 29 जिला सहकारी बैंक शाखाएं हैं। सहकारिता में चुनाव का आधार सहकारी समितियां ही हैं। समितियों में डायरेक्टर और सभापति का चुनाव होता है। इसके साथ ही अलग-अलग विभागों में डेलीगेट भेजे जाते हैं। ये डेलीगेट ही ब्लाक स्तर पर बैंकों के डायरेक्टर आदि का चयन करते हैं। बैंक के संचालक जिला सहकारी बैंक का चेयरमैन चुनते हैं। इसी तरह डीसीडीएफ में भी चुनाव होता है।
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सहकारी संघों में अभी तक सपा का ही कब्जा है। सहकारिता में उसी पार्टी का कब्जा सामान्य रूप से देखा जाता है, जिसकी प्रदेश में सरकार होती है। बीजेपी भी इस मौके को चूकना नहीं चाहती है। दूसरे इसी बहाने प्रदेश में वह अपने हजारों कार्यकर्ताओं को समायोजित कर सकती है। भाजपा के जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी ने पार्टी द्वारा चलाए जा रहे अभियान की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक समिति में कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया जा रहा है। सहकारिता के चुनाव में इस बार पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी। हाईकमान भी इसको लेकर गंभीर है।
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