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आस्था और श्रद्धा का केंद्र है सिद्धपीठ महादेव मंदिर

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श्रद्धा का केंद्र है सिद्धपीठ महादेव मंदिर
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चरथावल। अटूट श्रद्धा और आस्था का केंद्र प्राच्य महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व निराला है। पौराणिक मान्यता है कि श्रावण मास में सिद्धपीठ शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है। मंगलवार से तीन दिवसीय कांवड़ कैंप का आयोजन किया जाएगा।
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मुगलकालीन महादेव मंदिर पर श्रावण मास में मेला लगता है। मुख्यमार्ग स्थित मंदिर की मान्यता अनूठी है। मंदिर की उत्पत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकीं। हालांकि बुजुर्गों का मंतव्य है कि कई दशक पूर्व यहां बाबा गोरखनाथ के वंशजों ने यहां आकर तपस्या की तथा 40 दिन तक भूखे रहकर सिद्धि की थी। बुजुर्ग इलमचंद और कृष्ण शर्मा कहते हैं कि मंदिर परिसर में बने बाबा की धूनी आज भी विराजमान है। धूनी पर शिवभक्त नियमित हवन पूजन करते हैं। कमेटी के संयोजक सुभाष चंद त्यागी बताते हैं कि धूनी की राख बच्चों को अनेक बीमारियों में अचूक रामबाण है। श्रावण मास में कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर हर वर्ष लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लाने वाले कांवड़ियों के नि:शुल्क भोजन, प्राथमिक उपचार आदि की सुविधा मुहैया कमेटी द्वारा कराई जाएगी। कमेटी ने जीर्णोद्धार कराकर शिवलिंग परिसर को भव्यता प्रदान की है।
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