शुक्रताल हनुमतधाम में साप्ताहिक भागवत कथा में कथा व्यास स्वामी किरीट भाई जी महाराज ने कहा कि परमात्मा वही जो सबको मान देता है, सम्मान देता है। प्रभु चाहते हैं कि मेरे भक्तों को सम्मान मिले और मान मिले। नित्य योग करने से योग नहीं होता, नियम से प्रतिदिन करने से योग होता है। श्री कृष्ण भगवान की भक्ति करने से मानव के जीवन में भक्ति का अंकुर फूटता है। जीव को ज्ञान की प्राप्ति लगातार सत्संग सुनने से होती है।
हनुमान धाम स्थित कथा भवन में महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज के सान्निध्य में भागवत कथा का आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि साधक को मन, बुद्धि का विश्वास नहीं करना चाहिए। अंतर आत्मा जो बोले उसे करो। मन में परमात्मा के प्रति भावना से सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए। भगवान का स्मरण हर समय पर करें। कथा को सुनने के लिए अच्छे श्रद्धालु कम भोजन कर फलाहार करें। झूठ न बोले, क्रोध को कम करके बोले तो अच्छा है। सच्चे साधक को दूसरे पर प्रभाव नहीं डालना चाहिए। माता पिता व गुरु की आज्ञा का पालन बिना उत्तर दिए करना चाहिए। श्राद्ध करने से मुक्ति नहीं होती है, सदगति होती है। मुक्ति कोई नहीं दिला सकता है। अपने आप ही मुक्ति दिला सकते हो। अनादिकाल से भारतीय संस्कृति सनातन धर्म ही सर्वोत्तम धर्म है। कथा में मुख्य भूमिका निभा रहे देहरादून से पधारे नरेश मित्तल व सुरेश मित्तल ने परिवार के साथ कथा व्यास का पूजा अर्चना कर माल्यार्पण कर स्वागत किया। निशांत गुप्ता, अखिलेश मिश्रा, पुष्पेंद्र, राकेश अग्रवाल, लाला कंवर सेन गोयल, अरुण खंडेलवाल, राजीव, सुभाष आदि व्यवस्था बनाने में लगे हुए हैं।