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फलक पर युवा, कदमों में सफलता

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फलक पर युवा, कदमों में सफलता
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मुजफ्फरनगर। देश का भविष्य युवा हैं, यह कथन जिले के होनहारों पर सटीक है। खेल-खेती के साथ सिनेमा में युवाओं ने चमक बिखेरी है। अपनी मेहनत के बल पर युवाओं ने खुद को साबित करने के साथ सफलता को कदमों में झुका दिया। युवाओं ने नौकरी के बजाए अपने कंधों पर कामयाबी की बुनियाद रखी है। भरोसे के दम पर दुनियाभर में जलवा दिखाकर घर, परिवार और समाज के साथ देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है।

सिंगिंग में दानिश का जलवा
मुजफ्फरनगर। मुंबई सिनेमा पर्दे का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां खुद को साबित करने में बरसों गुजर जाते हैं। मोहल्ला लद्दावाला निवासी डॉ शाहनवाज के पुत्र मोहम्मद दानिश अपनी खानदानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। दानिश ने दादा उस्ताद अफजाल कुरैशी और नाना सूफी अब्दुस्समी चिश्ती साहब खैरी से गायकी के हुनर सीखे हैं। दानिश ने अपनी आवाज का जादू जीटीवी के सारेगामा, एंड टीवी के द वॉइस ऑफ इंडिया सीजन-2 के कार्यक्रम में जलवा बिखेरा है। दानिश ने इस्लामिया इंटर कालेज के कक्षा 12वीं तथा इंदिरा गांधी कला एवं संगीत यूनिवर्सिटी खैरागढ़ से बीए कर रहे हैं। सिंगिंग के क्षेत्र में युवा दानिश ने खुद को साबित किया है।
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एक्टिंग में छाया आयुष्मान
मुजफ्फरनगर। शहर के हंडिया मोहल्ला निवासी संजय सक्सेना का बेटा आयुष्मान फिल्मी दुनिया का उभरता सितारा है। आयुष्मान ने 12वीं तक शिक्षा ग्रहण की है। एक्टिंग का जुनून इस कदर हावी था कि उसने कुछ अलग करने की ठानी। आयुष्मान ने अपनी मेहनत के बल पर मुंबई में सिनेमा पर्दे पर जगह बनाई है। लाइफ ओके पर प्रसारित होने वाले सीरियल सावधान इंडिया के साथ कई डांस कार्यक्रमों में खुद को साबित किया। टीवी पर कई विज्ञापनों में वह छाया हुआ है। वर्तमान में आयुष्मान मुंबई में अपनी प्रतिभा के बल पर फिल्मों में जगह बनाने की कोशिश में लगे हैं।
खेल को बना ली अपनी दुनिया
मुजफ्फरनगर। जिले के कई युवाओं ने खेल में जलवा दिखाया है। मंसूरपुर के गांव पुरबालियान निवासी दिव्या सैन (काकरान) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहलवानी के जौहर दिखाए हैं। दिव्या ने दक्षिण अफ्रीका में हुए कॉमनवेल्थ गेम में कई पहलवानों को पटखनी देखकर गोल्ड जीता और देश, प्रदेश के अलावा घर, समाज का नाम रोशन किया। इसके अलावा गांव पीनना की झलक तोमर ने भी मेहनत और भरोसे के दम पर सफलता को कदमों में झुकाया है। यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय जूनियर महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में झलक ने भारत के लिए रजत पदक जीता है। यह युवा अन्य के लिए भी प्रेरणा बने हैं।
नौकरी नहीं, व्यवसाय को तवज्जो
मुजफ्फरनगर। पुरकाजी निवासी मणीकांत गोयल कपड़ा व्यापारी हैं। इकलौते बेटे अंकित को पढ़ा-लिखाकर एमबीए कराया, ताकि कहीं बड़ी नौकरी कर सके। अंकित को नौकरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं रही। वर्ष 2013 में एमबीए पास कर खुद के भरोसे पर कार्य किया। नौकरी की इच्छा हुई तो मुंबई, दिल्ली के अलावा बड़े शहरों से ऑफर आए, मगर अंकित ने सब ठुकरा दिए। अंकित ने खुद कपड़े का व्यवसाय शुरू किया। एक साल के भीतर अंकित ने कपड़े का बड़ा व्यापार शुरू कर लिया। जिसमें आमदनी एक लाख के पार है।
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वकालत छोड़ खेती में जुटे
मुजफ्फरनगर। मोरना के सुमित सहरावत ने बीए एलएलबी कोर्स किया है, लेकिन वकालत में मन नहीं लगा। कुछ अलग करने के इरादे से पैतृक कार्य खेती को चुना। खेती में गन्ना या मक्का की फसल को छोड़कर फल-फूल में हाथ आजमाए। सुमित ने एक एकड़ में अनार का बाग खड़ा किया है। इसके अलावा केले की भरपूर खेती कर रहे हैं। किसानों को नई राह दिखाने की सोच रखने वाले सुमित कहते हैं कि दुनिया बहुत बड़ी है, लेकिन आपकी मेहनत और आत्मविश्वास के आगे छोटी है। अनार और केले की खेती के दम पर सुमित हर सीजन में लाखों के वारे-न्यारे कर रहे हैं।
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