नारी कभी कमजोर नहीं होती : विजय कौशल
खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में एक मूल अंतर बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने करके दिखाया है, जबकि श्रीकृष्ण ने बोलकर दिखाया है। महाराज जी ने नारी सशक्तीकरण पर कहा कि नारी कभी कमजोर नहीं है। संस्कारी स्त्री कभी कमजोर नहीं होती। स्त्री को सिर्फ संस्कारी होने की आवश्यकता है।
केके जैन एजूकेशन सभास्थल में श्रीराम कथा समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में सातवें दिन कथा व्यास महाराज जी ने प्रभु श्रीराम और सीता जी के विवाह का वृत्तांत सुनाया। विनम्रता में इतनी ताकत होती है कि पत्थर की मूर्ति भी मुस्कराने लगती है। महाराज जी ने जानकी स्वयंवर का वृत्तांत सुनाते हुए बताया कि जानकी जी भक्ति स्वरूप है। भक्ति बहुत धीरे धीरे होती है और भक्ति बिना गुरु के नहीं होती है। जिस प्रकार वृक्ष की लगाए बिना किसी के सहारे के नहीं चलती। महाराज जी ने सीता स्वयंवर का वृत्तांत बड़ा सुंदर एवं मार्मिक प्रस्तुत किया। जैसे ही प्रभु राम धनुष को तोड़ने के लिए उठे सबसे पहले प्रभु राम ने धनुष की तीन बार परिक्रमा की और माता पिता को प्रणाम किया। गुरु को प्रणाम किया, गणेश जी को प्रणाम किया, भगवान शंकर को प्रणाम किया। फिर धनुष को उठाया, तभी पूरे पंडाल में भयंकर आवाज हुई और माता जानकी जी वर माला लेकर प्रभु के समक्ष आ गई। मंच संचालन अतुल अग्रवाल ने किया। डोली बंसल, एकता गोयल, अनिता छाबड़ा, शशी शर्मा, डॉ. डीके शर्मा पूर्व प्राचार्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान, विधायक कपिलदेव अग्रवाल, प्रमोद शर्मा, नरेंद्र गहलौत, समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत अग्रवाल, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, नरेंद्र सिंह गहलोत, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली बंसल, अतुल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनीत ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि उपस्थित रहे।