मोदी, योगी सरकार में गरीबों के अच्छे दिन होने के दावे किए जा रहे हैं, मगर पुराना सिस्टम गरीब बच्चों की सुनने को तैयार नहीं है। गरीब बच्चों के एडमिशन और पढ़ाई की परवाह अफसरों को नहीं है।
शिक्षा का अधिकार के तहत सभी पब्लिक स्कूलों को गरीब बच्चों के लिए अपने स्कूल में 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिला देने का प्राविधान है। लेकिन पिछले साल शहर के सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों ने इस नियम का पालन नहीं किया।
इस योजना के तहत जो भी पैरेेंट्स प्रक्रियाएं पूरी करने स्कूल पहुंचे उन्हें स्कूल प्रबंधन ने एडमिशन देना तो दूर उनके फॉर्म पर नजर तक नहीं डाली थी। स्कूलों से निराश लौटे पैरेंट्स ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
लेकिन स्कूलों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी नहीं सुनी और कई तरह के बहाने बनाकर गरीब बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिला नहीं दिया। जब कि शासन के सख्त आदेश हैं कि किसी भी स्कूल में शिक्षा का अधिकार के तहत गरीब वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
लेकिन शहर के इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में से दो चार स्कूलों को छोड़ कर किसी स्कूल ने नियम का पालन नहीं किया। इसमें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने भी लापरवाही बरतते हुए मनमानी करने वाले स्कूलों पर कोई कार्यवाही नहीं की।