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यानी बड़े नोट बंद होते ही दानियों ने ‘चीर डाला सीना’

Sat, 26 Nov 2016 02:03 AM IST
उमेश शर्मा /अमर उजाला, मुरादाबाद
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denominations of 50 and 100 rupee
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सरकार ने हजार - पांच सौ के पुराने नोट क्या बंद किए रातोंरात दानियों की ‘फौज’ पैदा हो गई। मंडल के कुछ चैरिटेबल ट्रस्टों पर इतनी माया बरसी कि बोरों में भी न समा सकी। महज पंद्रह दिन में मंडल के कुछ चैरिटेबल ट्रस्टों ने बैंकों में दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक के पुराने नोट जमा कराए हैं। 


दस - बीस के नोट की तो बात ही छोड़िए किसी ने सौ के नोट को भी हाथ नहीं लगाया। दानियों ने सारा दान हजार - पांच सौ के पुराने नोटों में ही दिया है। लेकिन ये महादान अब इन ट्रस्टों के जी का जंजाल बन गया है। पाई - पाई का हिसाब रख रहे       पीएमओ तक ट्रस्टों का मायाजाल पहुंचते ही केंद्र की तमाम एजेंसियां एक्टिव हो गई हैं।
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आईबी ने इन ट्रस्टाें को रडार पर ले लिया है।


स्कूल - कालेजों, उच्च शैक्षणिक संस्थानों और मंदिरों का संचालन करने वाले मंडल के कुछ चैरिटेबल ट्रस्टों की ओर से आठ नवंबर के बाद से अब तक करीब दो हजार करोड़ रुपये बैंकों में जमा कराए जा चुके हैं। ट्रस्टों ने इस रकम को दान की रकम बताया है। शैक्षणिक संस्थानों को संचालित करने वाले ट्रस्टों ने इस रकम को स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स की ओर से मिला डोनेशन बताया है। जबकि मंदिरों को संचालित करने वाले ट्रस्टों ने दावा किया है कि ये करोड़ों रुपये उनके मंदिरों की दान गुल्लकों से निकले हैं।

लेकिन ट्रस्टों की ये पैंतरेबाजी काम नहीं आने वाली। आईबी ने ट्रस्टाें को सर्विलांस पर ले लिया है। वित्त मंत्रालय की टीम पूरे मामले का विश्लेषण कर रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि आईबी और इनकम टैक्स महकमे के साथ ही सरकार जल्द इस मामले में तह जाने के लिए सीबीआई को भी टास्क सौंप सकती है।

सालभर में 5 करोड़ नहीं, 15 दिन में 2000 करोड़
मुरादाबाद(ब्यूरो)। सरकार को चकमा देने के फेर में चैरिटेबल ट्रस्ट बुरी तरह फंस गए हैं। दरअसल अपने यहां पढ़ने वाले हरेक स्टूडेंट और उसके अभिभावकों के नाम पर बीस - बीस हजार रुपये के दान की रसीदें फाड़कर ट्रस्टों ने फर्जी बहीखाता तैयार तो कर लिया लेकिन अब उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल ट्रस्ट अपनी ही लिखी स्क्रिप्ट में फंस गए हैं। खास बात यह है कि जिन ट्रस्टों को सालभर में किसी ने कुल पांच करोड़ दान नहीं दिया उन ट्रस्टों पर नोटबंदी के बाद महज 15 दिनों में दो हजार करोड़ रुपये की माया बरस पड़ी। अब आईबी और दूसरी एजेंसियां इन ट्रस्टों से यही पूछने की तैयारी में हैं कि उन्हें आठ नवंबर से पहले पूरे साल में कितना डोनेशन मिला औरा आठ नवंबर के बाद के महज 15 दिनों में कितना डोनेशन मिला।

ट्रस्टों में खपाई गई अफसरों की काली कमाई
मुरादाबाद। आईबी को पुख्ता सूचनाएं मिली हैं कि मुरादाबाद के कुछ चैरिटेबिल ट्रस्टों ने अफसरों की काली कमाई को ठिकाने लगाया है। आईबी की सेंट्रल यूनिट ने ऐसे कुछ अफसरों के नाम भी ट्रेस किए हैं। वित्त मंत्रालय की टीमें भी ट्रस्टाें के इस खेल पर नजरें गड़ाए हुए हैं। आईबी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि बहुत जल्द सीबीआई इस मामले में ट्रस्टों के कर्ताधर्ताआें से पूछताछ कर सकती है।
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डोनेशन मिली तो घर - मंदिर में क्यों रखे रहे? 
मुरादाबाद। बैंकों में दो हजार करोड़ रुपये जमा कराने वाले मंडल के चैरिटेबल ट्रस्टों ने यह डोनेशन बैक डेट में दर्शायी है। लेकिन अब इन ट्रस्टों को इस सवाल का जवाब देना होगा कि जब उन्हें आठ नवंबर से पहले डोनेशन मिली थी तो वह इतनी बड़ी रकम को घर में क्यों रखे रहे। रकम को बैंकों में जमा क्यों नहीं कराया। जबकि यह रकम आयकर से मुक्त होती है। दरअसल चैरिटेबल ट्रस्टाें ने अपनी ब्लैक मनी को व्हाइट करने के साथ ही कुछेक अफसरों की काली कमाई को भी सफेद किया है। मंदिरों के ट्रस्टों ने तो हर रोज अपने मंदिर के दान पात्र में करोड़ों रुपये का चढ़ावा दर्शाया है। आईबी को मिली सूचनाओं के मुताबिक मुरादाबाद के एक मंदिर ट्रस्ट संचालक ने बाकायदा इसके लिए मैसेज भेजकर लोगों को ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खुला ऑफर तक दिया। अपनी ब्लैक मनी को खपाने के साथ ही इस ट्रस्ट ने करोड़ों रुपये की ब्लैक मनी एक्सचेंज करके सरकार को बड़ी चोट पहुंचाई है।
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