मैनाठेर। जनप्रतिनिधि गांवों को बेहतर सड़क, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के दावे करते हैं लेकिन सुंदरपुर कल्याण की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आई। गांव के मुख्य रास्ते पर इतना कीचड़ और दलदल जमा हो गया कि ग्रामीणों ने विरोध जताने के लिए उसी सड़क पर धान की रोपाई कर दी। यह विरोध केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि उन अधूरे विकास कार्यों पर सवाल है जिनका लाभ आज तक गांव के लोगों को नहीं मिल सका। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण सड़क पर पहुंचे। कीचड़ और पानी से लबालब रास्ते में धान रोपकर उन्होंने ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना था कि बरसात शुरू होते ही यह रास्ता सड़क नहीं, बल्कि धान का खेत बन जाता है। ऐसे में रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब विकास योजनाओं पर हर साल लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, तो आखिर गांव की मुख्य सड़क की यह बदहाली किसकी जिम्मेदारी है? अगर शिकायतों के बाद भी हालात नहीं बदलते, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या ग्रामीणों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए हर बार इसी तरह अनोखे विरोध का सहारा लेना पड़ेगा? प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। प्रदर्शन में राजमाला, बसंतिया, लढेतिया, नीरज, पूनम, प्रियंका, कश्मीरा, डॉली, मिथलेश, अनीता, सुमरतिया, रामप्यारी, संतरेश, सावित्री, सुनहरी और शमीम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।