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अंतर्राष्ट्रीय महिला समानता दिवस विशेष... रोजगार के क्षेत्र में समानता से दूर है आधी आबादी

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मुरादाबाद। महिलाएं वर्तमान में सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। चाहे बात देश चलाने की हो या फिर घर संभालने की। देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी हो या फिर विज्ञान की अबूझ पहेलियों को सुलझाने की, वे सभी क्षेत्रों में अपनी भूमिका को बखूबी निभा रही हैं। लेकिन आज भी रोजगार के अवसरों में उन्हें समानता हासिल नहीं है। मुरादाबाद जनपद की ही बात करें तो क्षेत्रीय सेवा योजन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में महिलाओं की अपेक्षा पांच गुना अधिक पुरुष कर्मचारी हैं। स्थिति यह है कि विभाग की ओर से वर्ष 2019 और 2020 में 17 रोजगार मेलों का आयोजन हो चुका है, लेकिन रोजगार सिर्फ 39 महिलाओं को ही मिल सका है। सहायक निदेशक का कहना है कि कंपनियों की वेतन विसंगतियों और समान सुविधाओं के अभाव की वजह से यह अंतर बना हुआ है। कई बार इस समस्या को सुलझाने के लिए कंपनियों से वार्ता भी की है।
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सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का रहता है आंकड़ा
सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में मुरादाबाद में 30724 कर्मचारी हैं, जिसमें से 6308 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। सार्वजनिक क्षेत्र (केंद्र सरकार, राज्य सरकार, अर्ध केंद्र सरकार, अर्ध राज्य सरकार, स्थानीय निकाय) में 23780 कर्मचारी हैं, जिसमें 4758 महिला कर्मचारी, निजी क्षेत्रों में 6944 कर्मचारियों में से 1550 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं।
इस वर्ष सिर्फ एक युवती को मिला रोजगार
बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए क्षेत्रीय सेवा योजन कार्यालय की ओर से वर्ष 2019 में 14 रोजगार मेले लगाए गए, जिसमें 849 युवाओं को रोजगार मिला, जिसमें युवतियां सिर्फ 38 थीं। वहीं वर्ष 2020 में लगाए गए तीन रोजगार मेलों में 99 युवाओं में से एक युवती को रोजगार मिला है।
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रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाली कंपनियां ज्यादातर फील्ड की नौकरी के लिए युवाओं का चयन करती हैं। इसके लिए महिलाएं उनकी प्राथमिकता नहीं होती हैं। इसके अलावा जब वह आठ या दस युवाओं का चयन करती हैं तो अधिकारी सभी युवाओं को एक साथ रहने की व्यवस्था करते हैं, लेकिन महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता है। इसके अलावा मेले में चयनित युवाओं को ज्यादातर आठ से दस हजार रुपए वेतन मिलता है। इतने कम वेतन में कोई भी युवती दूसरे जनपद में जाना नहीं चाहती है। इसलिए रोजगार मेलों में चयनित होने वाले युवाओं में युवतियों की संख्या बहुत कम होती है।
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कमल किशोर, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय सेवा योजन कार्यालय।
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