मुरादाबाद। 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज व्यवस्था की छोटी सरकार का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा, हालांकि आगे पंचायतों के संचालन की व्यवस्था क्या होगी, इस पर शासन ने अभी भी चुप्पी साध रखी है। वहींप्रदेश कैबिनेट में पिछड़ा वर्ग आयोग को मंजूरी मिलने के बाद ग्राम पंचायतों में सीट आरक्षण रोटेशन का बदलना अब लगभग तय है।
इससे यह तो माना जा रहा है कि सरकार ने पंचायत चुनाव कराने की ओर एक कदम बढ़ाया है लेकिन आयोग पहले पिछड़ी जाति का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देगा, तभी पंचायतों में सीटों का आरक्षण तय हो पाएगा। पिछले महीने तक हर एक ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के दावेदारों में भारी जोश देखा जा रहा था, गांव में संभावित प्रत्याशियों के पोस्टर व बैनर नजर आने लगे थे। सामूहिक कार्यक्रमों में दावेदारों की भागीदारी भी काफी बढ़ गई थी लेकिन अब लगा कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे या फिर विधानसभा चुनाव के बाद भी हो सकते हैं, इसे देखते हुए दावेदारों का जोश ठंडा पड़ गया है।
गौहरपुर सुलतानपुर के प्रधानपति संजय कुमार के अनुसार उनकी ग्राम पंचायत में तो कम से कम पचास दावेदार थे, लगभग सभी ने अपने पोस्टर गांव की गलियों में लगा दिए थे लेकिन अब कोई नजर नहीं आ रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल तो 26 मई को समाप्त हो जाएगा लेकिन आगे पंचायतों के संचालन की क्या व्यवस्था रहेगी, इस बारे में शासन से अभी तक कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
- सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए नया आयोग बनाने का रहा। यह आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़ों की हिस्सेदारी का अध्ययन करेगा। पंचायत चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन तो दूर हो गई है लेकिन समय पर चुनाव अब संभव नहीं है। आयोग की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा। इससे सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता भी पूरी हो जाएगी।
मोहम्मद उस्मान, अध्यक्ष भारतीय प्रधान संगठन