मुरादाबाद। स्वाइन फ्लू की निगरानी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के दावे और जमीन पर हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है। जिले में अब तक 12 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। विभाग संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले परिजनों की स्क्रीनिंग, निगरानी और जरूरत के अनुसार दवा उपलब्ध कराने का दावा करता रहा, लेकिन रामगंगा विहार निवासी 71 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक की मौत ने इस निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल में मरीज की मौत हो गई और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं हो सकी। मौत के करीब 24 घंटे बाद मामले का डेथ ऑडिट कराया गया। मृतक पहले से ही बीपी, शुगर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। ऐसे मरीजों में स्वाइन फ्लू के संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी 65 वर्ष से अधिक उम्र और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों वाले लोगों को गंभीर इन्फ्लुएंजा के उच्च जोखिम वाले समूह में रखता है। ऐसे मरीजों में लक्षण गंभीर होने पर जल्द एंटीवायरल उपचार की जरूरत बताई गई है। बड़ा सवाल यह है कि जब संक्रमित मरीजों के घर पहुंचकर उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी का दावा किया जा रहा था तो संक्रमण की चपेट में आए मरीज की हालत और इलाज की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के निगरानी तंत्र तक समय पर क्यों नहीं पहुंची। पहले मिले संक्रमित मरीजों के घर स्वास्थ्य विभाग की टीमें तीन दिन तक नहीं पहुंच सकी थीं। अब बुजुर्ग मरीज की मौत के बाद विभाग ने आनन-फानन में सभी संक्रमितों के घर टीमें भेजनी शुरू कर दी हैं। परिजनों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है और जरूरत के अनुसार दवा भी दी जा रही है।
सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों की रिपोर्टिंग तक नहीं
स्वाइन फ्लू से संक्रमित एक गर्भवती महिला जिला अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन उनकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर नहीं चढ़ी थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सर्विलांस अधिकारी को सूचना दी तब जाकर टीम को जानकारी हुई। सर्विलांस अधिकारी डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव का कहना है कि महिला ने जांच कहीं और कराई थी, इसलिए उनका विवरण पोर्टल पर नहीं है। मरीज की तबीयत बेहतर बताई जा रही है, डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
वर्जन
सेवानिवृत्त प्रबंधक की मौत के बाद ऑडिट कराया गया है। वह पहले ही कई बीमारियों से जूझ रहे थे। सभी प्राइवेट लैब संचालकों से कहा गया है कि सभी मरीजों की रिपोर्टिंग विभाग को दें, जिससे मरीजों व उनके परिजनों को समय रहते उपचार मिल सके।
- डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी