प्रगति परीक्षा में कम नंबर आने पर अनुचित कदम उठाने वाले या जीवन से हार मान जाने वालाें के लिए मिसाल है। एक दुर्घटना में उसने दोनों हाथ गंवा दिए और जीवन अंधकारमय हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपनी जिद से जिंदगी को गुलजार करने की ठानी। बोर्ड परीक्षा में उसके साथ परीक्षा दे रहे साथी जब उसे कोहनियों के बीच पेन फंसाकर लिखते हुए देखते हैं तो आश्चर्यचकित हो जाते हैं।
पांच साल की उम्र में प्रगति छत पर खेलते समय बिजली के तारों की चपेट में आ गई थी। जान बचाने के लिए डाक्टरों को कोहनी से हाथ काटने पड़े। पिता आटो चलाकर परिवार को पालन पोषण करत हैं। ऐसे में उसने किसी पर बोझ नहीं बनने की ठानी। कोहनी से ही लिखना शुरू किया। दो साल पहले 85 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट किया और इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही है। साइंस ग्रुप में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रही है।