क्षेत्र के करनपुर गांव में बुधवार को एक बेटी की शादी दहेज लोभ और उत्पीड़न की भेंट चढ़ गई। तय तिथि पर दूल्हा पक्ष के बारात लेकर न पहुंचने से दुल्हन पक्ष को गहरा सदमा लगा और खुशियों का माहौल देखते ही देखते मातम में बदल गया। रतनपुर कला स्थित ख्वाजा बैंक्विट हॉल में 22 अप्रैल को आयोजित इस शादी में सभी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन दूल्हा पक्ष की मांगों ने पूरे समारोह को विवाद और अपमान में बदल दिया।
करनपुर निवासी एक किसान ने बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री का रिश्ता लगभग एक वर्ष पूर्व थाना मैनाठेर क्षेत्र के गांव कुरी वरैठा निवासी बिन यामीन के साथ तय किया था। दोनों परिवारों की सहमति से 22 अप्रैल की तारीख शादी के लिए निर्धारित की गई थी। दुल्हन पक्ष ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी इंतजाम किए थे। बैंक्विट हॉल में मेहमानों की भीड़, सजे हुए मंडप और रस्मों की तैयारियों के बीच दुल्हन अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के लिए उत्सुक थी।
परिजनों का आरोप है कि दूल्हा पक्ष की नीयत पहले से ही संदेह के घेरे में थी। 19 अप्रैल को इस संबंध में पाकबड़ा थाने में एक प्रार्थना पत्र भी दिया गया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई, जिसमें यह तय हुआ कि बिना किसी अतिरिक्त मांग के निर्धारित तिथि पर बारात आएगी और विवाह संपन्न होगा। बावजूद इसके, दूल्हा पक्ष ने समझौते का पालन नहीं किया।
पीड़ित परिवार के अनुसार, शादी वाले दिन बिचौलिए के माध्यम से फोन कर दूल्हा पक्ष ने अचानक दहेज की नई मांग रख दी। आरोप है कि परिजन अबरार, रशीदा उपसिफा, आयशा, महक, गुलनाज, नूरानी को सोने की चेन, सोने के कंगन और 15 लाख रुपये नकद देने की शर्त रखी गई और स्पष्ट कहा गया कि मांग पूरी न होने पर बारात नहीं लाई जाएगी। दुल्हन पक्ष ने इसे गैरकानूनी बताते हुए मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद बारात नहीं आई।
दुल्हन ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कुछ दिन पहले बिन यामीन ने बहाने से उसे डीगरपुर स्थित अपनी दुकान पर बुलाया और ऊपर कमरे में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की। पीड़िता के अनुसार, वह किसी तरह वहां से बचकर अपने घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इस पूरी घटना से आहत परिवार ने पाकबड़ा थाने पहुंचकर तहरीर दी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पलिस ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।