कमजोर आंखों के सहारे रोडवेज का सफर पूरा कराया जा रहा है। किसी के आंखों कमजोर हैं तो किसी की आंखों में मोतियाबिंद है। किसी को चश्मा बदलवाने की जरूरत है तो किसी को दूर का नहीं दिखाई देता है। इसका गुरुवार को पीतलनगरी वर्कशाप में हुए नेत्र परीक्षण में हुआ है।
125 रोडवेज चालकों और कर्मचारियों की आंखों की जांच गई। इसमें 42 चालकों और कर्मचारियों की आंखें कमजोर मिली। जबकि ग्यारह की आंखों में मोतियाबिंद पाया गया। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत गुरुवार को पीतलनगरी वर्कशाप में नेत्र शिविर लगाया गया।
शिविर में पहुंची सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट की टीम ने 125 रोडवेज कर्मचारियों की आंखों की जांच की। नेत्र परीक्षण कराने वालों में चालक, परिचालक और वर्कशाप कर्मचारी शामिल रहे। परीक्षण में 53 रोडवेज कर्मचारियों की आंखें कमजोर मिली।
42 चालकों और कर्मचारियों को चश्मा बदलवाने की जरूरत थी, लेकिन ये कर्मचारी पुराने चश्मे से काम चला रहे थे। वहीं जांच में 11 चालकों की आंखों में मोतियाबिंद पाया गया। टीम ने इन कर्मचारियों को आपरेशन कराने की सलाह दी है।
आरएम अतुल जैन ने बताया कि चालकों की आंखों की जांच रूटीन में कराई जाती है। अगर किसी ड्राइवर की आंखें कमजोर मिलती है तो उसे आई फिटनेस देना पड़ता है। इसके बाद ही उससे ड्यूटी कराई जाती है।