शहर के जामा मस्जिद पार्क में रविवार को काफी तादात में आईं महिलाओं ने तीन तलाक बिल के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए शरीयत की सुरक्षा की मांग की। अपने हाथों में बिल के विरोध में नारे लिखीं तख्तियां थामे महिलाओं ने बिल वापस लेने की मांग की। उनकी विरोध सभा की अगुवाई करने हैदराबाद से आईं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की अध्यक्ष डॉ.आसमा जाहरा ने कहा कि महिलाओं और बेटियों को जिंदा रहने का हक इस्लाम शुरू होने पर मिला, वरना बेटियों को जिंदा दफना दिया जाता था।
पैगंबर मुहम्मद साहब ने इस्लाम फैलाकर लोगों को बुराइयां छोड़कर अच्छे रास्तों पर चलना सिखाया। पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी मुरादाबाद के तत्वावधान शरीयत की सुरक्षा और तीन तलाक बिल के विरोध में हुई मुस्लिम महिलाओं की सभा में डॉ.आसमा ने कहा कि इस्लाम से ही लोगों ने जाना की मां के कदमों के नीचे जन्नत होती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम परिवार में एक सिस्टम होता है, अगर किसी महिला पर दिक्कत आ जाए तो उसका परिवार (मायका पक्ष) पूरी तरह से उसकी सपोर्ट करता है।
भाई और पिता बचपन से लेकर आखिर तक उसके निगहबान होते हैं। उन्होंने साफ कहा कि शरीयत हमारा कानून है, इसमें किसी भी तरह की तब्दीली नहीं होने देंगे, हम शरीयत के पाबंद रहेंगे। इस बात का सभा में मौजूद महिलाओं ने हाथ उठाकर समर्थन भी किया। शहर इमाम हकीम सैय्यद मासूम अली आजाद ने कहा कि शरीयत में किसी तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के जिला संयोजक सलीम बाबरी ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर मुरादाबाद में तीन तलाक बिल के विरोध में सभा कर उसे वापस लेने की आवाज उठाई गई, इसमें सभी का सहयोग रहा। सहयोग के लिए उन्होंने सभी का आभार जताया।