सीएचसी में उपचार के लिए पहुंचे घायल युवक को जब महिला चिकित्साधिकारी ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया शुरू की, तो ग्रामीण हंगामा करने लगे। ग्रामीण सीएचसी में ही इलाज कराने का दबाव बनाने लगे। ग्रामीणों के धमकाने और अभद्रता करने से परेशान महिला चिकित्साधिकारी ने रोते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी सीएमओ को दी।
महिला चिकित्साधिकारी डाॅ. श्वेताम्भरी त्यागी ने बताया कि एक घायल ई-रिक्शा चालक को बेहोशी की हालत में गांव के लोग सीएचसी लेकर आए थे। उन्होंने तत्काल घायल का प्राथमिक उपचार किया और उसे ऑक्सीजन देनी शुरू की। युवक के सिर और शरीर के अन्य भागों पर गंभीर चोटें होने की वजह से उसे तत्काल जिला अस्पताल भेजना जरूरी था। चिकित्साधिकारी के अनुसार उन्होंने घायल युवक के परिजनों से फोन करके 108 एम्बुलेंस बुलाने को कहा, लेकिन एंबुलेंस बुलाने की बजाय वे लोग जिद करने लगे कि यहीं पर इलाज करो और उसे ठीक करो।
चिकित्साधिकारी का आरोप है कि उनके अनुरोध करने और समझाने के बाद भी भीड़ में से कई युवकों ने उनसे अभद्रता करते हुए धमकाना शुरू कर दिया और वीडियो बनाने लगे। किसी तरह भीड़ से निकलकर वह अपने कक्ष में पहुंची। महिला चिकित्साधिकारी ने फोन से रोते हुए घटन की पूरी जानकारी सीएमओ और सीएचसी अधीक्षक को दी। दोनों अधिकारियों से यह भी कहा कि पर्याप्त सुरक्षा मिले बिना वह रात ड्यूटी करने में असमर्थ हैं। महिला चिकित्साधिकारी के अनुसार महिला चिकित्सकों और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए सीएचसी के अलावा राजकीय महिला अस्पताल में रात को कोई सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर नहीं रहता है।